पंचेत, जेएनएन। जुनकुदर स्थित मंगल मूर्ति धाम में हनुमंत कथा के दूसरे दिन श्रीश्री हनुमान कथा का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ शुरू हुआ। कथा वाचक व्यास पीठ वृंदावन के प्रदीप भैया ने सुंदरकांड की चर्चा की। इस दौरान प्रदीप भैया ने हनुमान जी के उड़ने से लेकर लंका जाने तक मनोरम का वर्णन किया। कहा कि नई पीढ़ी के लोग बड़े बुजुर्गो के बात नहीं सुनते हैं। सुख समृद्धि चाहिए तो किसी देवी-देवताओं के बजाय बुजुर्गो के पास जाएं। बच्चे रोते हैं तो पास पड़ोस के लोग जान जाते है। लेकिन बूढ़े मां बाप के रोने की आवाज किसी को पता नहीं चलती। गुरु गो¨बद के बच्चे शेर के बच्चे थे। इसके चलते आज हिंदू धर्म सुरक्षित है।

उन्होंने वन वनवास के दौरान लक्ष्मण के मां सुमित्रा ने पत्नी उर्मिला के त्याग की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राम सीता के साथ उस चचेरे भाई लक्ष्मण को वनवास जाने की क्या जरूरत थी। ऐसा उदाहरण आज देखने को नहीं मिलती। लक्ष्मण ने पूरे जीवन काल में तीन बार आंसू बहाये। पहली बार बनवास जाते समय उर्मिला से मिलते हुए, दूसरी बार माता सीता के गर्भावस्था में वन में छोड़ने एवं सीता माता के अग्नि परीक्षा के समय। उन्होंने कहा कि माताओं के कारण ही धर्म सुरक्षित है। इस दौरान वाशरी प्रबंधक एन ¨सह, अजय पासवान, रमेश ¨सह, सुदेश ¨सह, एके ठाकुर, गुड्डू ¨सह, बलराम अग्रवाल, सीता राम गोयल, कमल अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, धीरज ¨सह, ¨रटू पाठक, बाबन मित्रा, सुदेश ¨सह, राज कपूर साव, जलंधर राम सहित अन्य उपस्थित थे।

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