जागरण संवाददाता, धनबाद : कोयलांचल ने शनिवार को शहीद रणधीर प्रसाद वर्मा को याद दिया। मौका था उनके 24वें शहादत दिवस का। रणधीर वर्मा चौक पर शहीद वर्मा की आदमकद प्रतिमा के समक्ष आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में बड़ी संख्या में लोग शरीक हुए। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि जब समारोह में आम और खास लोग नम आंखों से श्रद्धांजलि दे रहे थे तो प्रकृति भी अपने को नई रोक पाई। बारिश की बूंदे बन शहीद को श्रद्धांजलि दी।

3 जनवरी 1991 को दुर्दात आतंकवादियों से लड़ते हुए धनबाद के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रणधीर प्रसाद वर्मा शहीद हो गए थे। उनकी याद में आयोजित होने वाले सालाना श्रद्धांजलि समारोह में कलाकारों ने अपनी भावमय प्रस्तुति से अद्भुत समा बाधा। देश के विभिन्न भागों में अपनी गायकी की प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाले बोकारो के गायक अमरजी सिन्हा ने जब 'मन समर्पित तन समर्पित और यह जीनव समर्पित..' प्रेरणा गीत पेश किया तो उसके स्वर की बारीकी ने लोगों को चकित कर दिया। उनकी दूसरी पेशकश 'राम का गुणगान करिए..' में सुर-ताल की उसकी पकड़ के लिए लोगों को उन्हें दाद देनी पड़ी। धनबाद के देदीप्यमान गायक पंकज दूबे ने कबीर को गाना शुरू किया तो पूरा माहौल कबीरमय हो गया। 'कोन ठगवा नगरिया लुटल रे..' में जीवन की आखिरी विदाई का बड़ा ही मार्मिक विवरण था। उन्होंने 'बागवानी का दावा है तुझमें अगर, खून देना पड़ेगा चमन के लिए..' प्रस्तुत कर श्रोताओं को देशप्रेम और साहस के जच्बा से रूबरू कराया। उन्होंने इस गीत में देशभक्ति व कुर्बानी के भाव को शास्त्रीय संगीत में पिरोकर साबित किया कि ओज और उत्साह, वीरता और शौर्य को मार्चपास्ट या अभियान संगीत के फार्म से बाहर भी प्रभावशाली ढंग से पिरोया जा सकता है। संगीतमय श्रद्धाजलि सभा में आज कोयलाचल के गायक व संगीतकारों का समागम हुआ था। तबले पर सुधीर कुमार, आर्गन पर दीपू, वायलीन पर अरूप रक्षित तथा नाल पर बिठ्ठल ने सही संगत कर गीत और भजनों में निखार ला दिया। मशहूर सास्कृतिककर्मी केके श्रीवास्तव की जादुई आवाज और करिश्माई शब्द संयोजन ने कार्यक्त्रम में चार चाद लगा दिया था। इस मौके पर सासद पशुपतिनाथ सिंह ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रो. वर्मा ने एक ऐसा मंच उपलब्ध करा रखा है, जिसके जरिए हम प्रतिवर्ष अमर शहीद वर्मा को भावपूर्ण तरीके से याद करते हैं। यह सही है कि रणधीर वर्मा की शहादत से उपजी एक विशेष परिस्थिति के तहत प्रो. वर्मा राजनीति में आईं थी। पर हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि उन्होंने जो जमीन तैयार की थी, उसी की देन हम सब हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रो.रीता वर्मा ने रणधीर वर्मा को याद करते हुए कहा कि रणधीर जी न्याय की प्रतिमूर्ति और सज्जनता के अवतार थे। पुलिस की नौकरी करते हुए ऐसी मिशालें कायम की थीं कि वे आज भी हम सबके लिए प्रेरणा के स्त्रोत हैं।

इस मौके पर उपायुक्त प्रशांत कुमार, पुलिस अधीक्षक हेमंत टोप्पो, विधायक ढुलू महतो, विधायक अरूप चटर्जी, पूर्व विधायक ओपी लाल, भाजपा के जिला अध्यक्ष हरिप्रकाश लाटा आदि राजनेताओं ने भी शहीद वर्मा को श्रद्धा-सुमन अर्पित किया। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के डीआईजी ओपी नारायण ने भी शहीद बेदी पर माल्यार्पण किया। रणधीर वर्मा मेमोरियल सोसाइटी के अध्यक्ष किशोर कुमार ने कहा कि अगले साल रणधीर वर्मा के 25वें शहादत दिवस पर वृहत्त कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजन समिति के अध्यक्ष डीएन प्रसाद ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए उपस्थित जनता और कलाकारों के प्रति आभार प्रकट किया। मौसम ने कार्यक्रम में थोड़ी देर के लिए खलल डाला। लेकिन, जल्द ही बारिश थम गई और कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो गई।