जासं, धनबाद : टेट परीक्षा में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषा से पास अभ्यर्थियों की मान्यता रद करने संबंधी शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव की घोषणा के विरोध में सोमवार को यहां जनता मजदूर संघ की ओर से महा धरना दिया गया।

जमसं महामंत्री सह पूर्व मंत्री बच्चा सिंह ने कहा कि 25 हजार परीक्षार्थियों में 13 हजार भोजपुरी और मगही से हैं जिसे रद करने का हक मुख्यमंत्री को भी नहीं है। इसमें कानूनी अड़चन है। टेट परीक्षा में भोजपुरी के खिलाफ शिक्षा मंत्री की घोषणा के पीछे मुख्यमंत्री का समर्थन है। राजनीतिक स्तर पर इसका जोरदार विरोध किया करेंगे। राज्य भर में घूम-घूम कर बताएंगे कि भोजपुरी-मगही भाषा भाषियों की संख्या इतनी अधिक है कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उपमेयर नीरज सिंह ने कहा कि राज्य गठन के तुरंत बाद डोमिसाइल का जिन्न बाहर निकला। अर्जुन मुंडा के शासन काल में सीएनटी एक्ट सामने आया जिससे आदिवासी ही सर्वाधिक प्रभावित हो रहे हैं। हेमंत सरकार ने अधिवास का मुद्दा उठाया जो केन्द्र सरकार के हस्तक्षेप से शांत हुआ। अब शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव ने टेट परीक्षा में भोजपुरी, मगही और अंगिका के विरुद्ध बयान देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। वह खुद को स्थापित करने के लिए ऐसा बयान दे रही हैं। राज्य एक बार फिर चौराहे पर खड़ा हो गया है। अगर राज्य स्थापना दिवस पर टेट परीक्षार्थियों को नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।

धरना की अध्यक्षता योगेंद्र प्रताप सिंह कर रहे थे। संचालन दामोदर सिंह ने किया। मौके पर बीबी सिंह, राजा यादव, बलराम पांडेय, दीपक राय, शंकर चौहान, जेपी सिंह, सुधीर सिंह, अरविंद सिंह, ललन सिंह, सुग्रीव सिंह, अजीम खान, मनोज सिंह, विनय यादव आदि थे।

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