रामकृष्ण परमहंस के मूलमंत्र पर दुनिया भर में नर नारायण सेवा कर रहा मिशन

जागरण संवाददाता, देवघर: रामकृष्ण मिशन का मूलमंत्र नर नारायण सेवा की शुरुआत सौ से अधिक वर्ष पहले देवघर के रोहिणी से हुई थी। आरके मिशन विद्यापीठ के सचिव स्वामी जयंतानंद महाराज ने कहा कि रामकृष्ण परमहंस देव बाबा की पूजा करने देवघर आए थे। यहां से काशी जाते वक्त रोहिणी गांव में उन्होंने गरीब और भूखे लोगों को देखा। उनके साथ जमींदार मथुरा बाबू थे। परमहंस ने उनसे कहा कि इनके लिए तेल, कपड़ा और भरपेट भोजन की व्यवस्था करो। मथुरा बाबू ने कहा कि अभी हमलोग यात्रा पर हैं बाद में करेंगे। रामकृष्ण बोले नहीं पहले यह करो नहीं तो हम यहीं रूक जाएंगे। तब सभी लोगों को उनके आदेश पर सारी सामग्रियां दी गई। सचिव ने कहा कि आज पूरी दुनिया में यह सेवा सालों भर चल रहा है। शताब्दी जयंती वर्ष की शुरुआत मंगलाचरण: नर नारायण सेवा कार्य से किया जा रहा है। मोहनपुर और बिहार के जयपुर गांव से 100 नर नारायण की आज पूजा की गयी है। यह एक सौ लोग आज के हीरो हैं। सितंबर में विशेष आयोजन होगा। ठाकुर परमहंस ने कहा था कि इन पर दया नहीं इनकी सेवा व पूजा करो। स्वामी सनकानंद महाराज अध्यक्ष रामकृष्ण मठ जामताड़ा ने मूल बातों को रेखांकित किया। ब्रहचारी अतुल्य चैतन्य ने सामने बैठे नर नारायण की पूजा और आरती की। राज रोशन और कौशल किशोर पत्रलेख ने स्वामी विवेकानंद के उपदेशों का पाठ किया। स्वामी दिव्य सुधानंद महाराज प्रिंसिपल विद्यापीठ ने धन्यवाद ज्ञापन में विद्यापीठ के समारोह के साथ सांसद के अतुलनीय कार्य की चर्चा की। कहा कि सांसद बनने के बाद भारत भारती के लिए, देवघर और झारखंड के विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। सांसद के एमबीए व इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने की दिशा में कार्य होगा। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक उमाशंकर राव उरेंदु ने किया। जानकारी हो कि बुद्ध पूर्णिमा पर आयोजित कार्यक्रम का आरंभ सुबह की विशेष पूजा से हुआ। इसमें सन्यासी, शिक्षक और छात्रों ने हिस्सा लिया। हवन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। सांसद डा. निशिकांत दुबे अपने पुत्र के साथ पहुंचे। ठाकुर जी के मंदिर में शीश नवाकर कार्यक्रम में शरीक हुए। खाद्य व वस्त्र सामग्री किट का वितरण किया। और नर नारायण सेवा के दौरान प्रसाद भी परोसा।

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