विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

UGC के नए नियमों के खिलाफ देवघर में सड़क पर उतरा सवर्ण समाज, एक फरवरी को बंद का एलान

By Manoj Singh Edited By: Mritunjay Pathak
Published: Tue, 27 Jan 2026 04:23 PM (IST)Updated: Tue, 27 Jan 2026 05:17 PM (IST)

UGC New Regulations: देवघर के करौं में सवर्ण समुदाय ने यूजीसी के नए इक्विटी रेगुलेशन का कड़ा विरोध किया। उनका ...और पढ़ें

HighLights

  1. यूजीसी के नए नियम का बढ़ता जा रहा विरोध।

  2. देवघर में स्वर्ण समाज ने बैठक कर किया विरोध।

  3. एक फरवरी को करौं प्रखंड बंद का किया एलान।

जागरण संवाददाता, करौं (देवघर)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए कानून का जमकर विरोध हो रहा है। इसके तहत सोमवार को देवघर के करौं प्रखंड के पटाबर मैदान में सवर्ण समुदाय की बैठक हुई, जिसमें इस नए नियम का कड़ा विरोध किया गया। इस दौरान लोगों ने 'काला कानून वापस लो' के नारे भी जमकर लगाए।

उपस्थित लोगों ने कहा कि यूजीसी का नया कानून समाज को विभाजित करने वाला है। उनका कहना था कि यह बिल समाज में खाई खोदने का काम करेगा। इस बिल का सीधा प्रभाव सवर्ण जाति की पीढ़ी पर पड़ेगा। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि इस बिल पर रोक नहीं लगी तो एक फरवरी को करौं बंद रखा जाएगा।

मौके पर शरदेंदु सिंह, ऋषि सिंह, संजीव चौधरी, दीपक चौधरी, शशि प्रकाश सिंह, अमित ओझा, अमित उपाध्याय, संतोष सिंह, मनोहर सिंह, शिवशंकर पांडेय, विशाल राय, राजेंद्र सिंह, राजू राय समेत अन्य लोग उपस्थित थे।

यूजीसी के नए नियम के विरोध के बीच गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने इसका समर्थन किया था। गोड्डा लोकसभा क्षेत्र के तहत ही देवघर आता है। अब निशिकांत दुबे के क्षेत्र से ही यूजीसी के नए नियम का विरोध शुरू हो गया है।

क्या है यूजीसी का नया कानून, जिस पर मचा है बवाल?

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने हाल ही में यूजीसी एक्ट 2026 इक्विटी रेगुलेशन लागू किया है, जिसे सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह नियम लागू किया गया है।

नए नियमों के तहत अब सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए समान अवसर प्रकोष्ठ बनाना अनिवार्य होगा। अभी तक यह व्यवस्था केवल एससी और एसटी के लिए ही लागू थी।

यह भी पढ़ें- यूजीसी के नए एक्ट का बढ़ता जा रहा विरोध, गिरिडीह में भाजपा नेता बबलू भारद्वाज का इस्तीफा

सबसे ज्यादा विवाद इस बात को लेकर है कि नए नियमों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भी 'जातिगत भेदभाव' की श्रेणी में शामिल किया गया है। जनरल कैटेगरी के कुछ छात्रों का मानना है कि ओबीसी वर्ग को पहले से ही आरक्षण जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, ऐसे में उन्हें भी इस श्रेणी में शामिल करना उचित नहीं है।