देवघर/रांची/धनबाद, जेएनएन। महाशिवरात्रि पर शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लगी हैं।देवघर के बाबा मंदिर में भी सुबह की विशेष पूजा के बाद से लंबी कतार लगी है। शाम को बाबा मंदिर पर पैराशूट से पुष्प वर्षा हुई। मोर मुकुट चढ़ाया गया। इसके बाद आयोजन समिति की ओर से शिव बरात निकाली गई। आज चार प्रहर की पूजा हुई। साल में एक दिन महाशिवरात्रि के दिन शाम में श्रृंगार पूजा नहीं होती है। पूरी रात मंदिर का कपाट खुला रहता है।

बाबा मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। प्राण प्रतिष्ठा के साथ पंचशूल को मंदिर के गुंबज पर स्थापित कर दिया गया। श्रद्धालुओं को पूजा अर्चना कराने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था कर ली गई है, सुबह तीन बजे से बाबा के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए। शिव बरात के लिए आयोजन समिति की ओर से बैद्यनाथ मंदिर के प्रांगण में हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की व्यवस्था की गई, मगर ऐन वक्त पर पैराशूट से पुष्प वर्षा हुई।

गौरतलब है कि द्वादश ज्योतिर्लिंग में एकमात्र झारखंड के देवघर स्थित बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग है, जहां शिव व शक्ति एक साथ विराजमान हैं। शिव-शक्ति के एक साथ विराजमान होने के कारण ही यहां महाशिवरात्रि की रात शिवलिंग पर सिंदूर दान होता है।

देवघर में शिव की बरात को लेकर बाबाधाम को आकर्षक लाइट से सजाया गया है।

फाल्गुन पास चतुदर्शी के दिन यहां चारों प्रहर की विशेष पूजा होती है और रात में विवाह का रस्म होती है। बहुत अनोखा दरबार है। जिस तरह श्रावणी मेला विश्वस्तरीय है, उसी तरह देवघर में निकलने वाली शिव बरात और उसकी झांकी राष्ट्रीय पहचान बना चुकी है। 1994 से निकलने वाली बरात का इस साल रजत जयंती वर्ष है। 2018 की झांकी का मुख्य आकर्षण बैताल पचीसा है, जो स्वचालित होगा और काफी भयावह होगा। इसके अलावा हृदयपीठ को रेखांकित करती झांकी, पेट कटुआ दैत्य, किचकिचा दैत्य, आतंका दैत्य, विक्रम वैताल, बंजारा हुकुम, धमाल डांसर भी लाखों बराती के आकर्षण में एक होगा। आयोजन समिति के अध्यक्ष राजनारायण खवाड़े के मुताबिक रजत जयंती को यादगार बनाने की हर संभव कोशिश की गई है।

रांची स्थित पहाड़ी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतार लगी रही।

भोलेनाथ की बरात में नाचेंगे अल्लाह के बंदे

महाशिवरात्रि पर सौहार्द की ऐसी मिसाल विरले ही देखने को मिलती है। बाबा की बरात में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य भी नाचते-गाते नजर आए। शिव बरात आयोजन समिति के अध्यक्ष राजनारायण खवाड़े अंजुमन इस्लामिया संगठन के सदस्यों को न्योते पर इस साल मंगलवार को मो. सरफराज, मो. सहादत, मो. मुर्शीद आलम, मो. अनवर, मो. इमरान ने बरात में शामिल होने पर सहमति जताई। 

देवघर के बाबा मंदिर में पूजा-अर्चना की गई।

जानें, शिवरात्रि पर क्या होता है खास

साल में एक दिन यानि शिवरात्रि से दो दिन पूर्व मंदिर के गुंबद से उतरता है पंचशूल-शिवरात्रि से एक दिन पूर्व प्राण प्रतिष्ठा कर विधि विधान से स्थापित होता है पंचशूल -जब तक गुंबद पर पंचशूल नहीं रहता, तब तक गठबंधन की नहीं होती रस्म अदायगी-पंचशूल स्थापित होने के बाद पहला गठबंधन करता है प्रधान पुजारी परिवार-महाशिवरात्रि के दिन ज्योतिर्लिंग पर होता सिंदूर दान-साल में केवल शिवरात्रि की शाम नहीं होता बाबा का श्रृंगार-दिन-रात होता है जलार्पण, चार प्रहर की होती है पूजा।

बाबा मंदिर का विहंगम दृश्य।

इतिहास के आईने में शिव बरात

-1994 : रिक्शे पर निकली थी बरात

-1995 : सड़क पर दौड़ने वाला ड्रैगन

-1996 : बैंड पार्टी के बीच नृत्य करता चमगादड़

-1997 : 12 फीट का काला दैत्य

-1998 : 20 फीट का बिच्छुआ दैत्य

-1999 : राक्षस-राक्षसी का संयुक्त रूप दमदमिया

-2000 : आधा राक्षस आधा कंकाल दैत्य

-2001 : 25 फीट का एनाकोंडा सांप

-2002 : हथमुंडा दैत्य, जिसके सर से ही हाथ निकलता था

-2003 : 10 फीट ऊंची दहकती खोपड़ी

-2004 : तहलका दैत्य

-2005 : तेलगीकांड से प्रेरित होकर तेलगा दैत्य

-2006 : झपट्टा दैत्य, लोगों को किया था भयभीत

-2007 : झल्लासुर एवं गुम्मा दैत्य

-2008 : मटका दैत्य, जो बीच-बीच में निकलता था

-2009 : चुटिया झूप दैत्य

-2010 : हुलकी सरकटा दैत्य

-2011 : भ्रष्टा दैत्य व रकस मुंडा

-2013 : दहका दैत्य

-2014 : 25 फीट का क्रोका दैत्य

-2015 : ट्विंक्ल वायरस

-2016 : 12 फीट का चंडमुंड दैत्य

-2017 : नोटबंदी पर आधारित माथा पीटता कलुआ दैत्य।

 

By Sachin Mishra