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Adhik Maas 2026: 17 मई से 15 जून तक दुर्लभ अधिक मास, इस समय भूलकर भी ना करें ये काम

Published: Tue, 12 May 2026 04:41 PM (IST)

साल 2026 में 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ मास में दुर्लभ अधिक मास का संयोग बन रहा है, ...और पढ़ें

ज्येष्ठ मास में 17 मई से अधिक मास का बन रहा दुर्लभ संयोग (AI Generated Image)

ज्येष्ठ मास में 17 मई से अधिक मास का बन रहा दुर्लभ संयोग (AI Generated Image)

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

अजय परिहस्त, देवघर। साल 2026 में अधिक मास का आरंभ 17 मई से हो रहा है, जो 15 जून तक रहेगा। इसके बाद शुद्ध ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष शुरू होगा, जो 29 जून यानी ज्येष्ठ पूर्णिमा तक चलेगा।

स्टेट पुरोहित श्रीनाथ महाराज के अनुसार, ज्येष्ठ मास में अधिक मास का यह संयोग काफी दुर्लभ होता है और अगली बार ऐसा संयोग 2037 में देखने को मिलेगा।

ऐसे अवसर पर बड़ी संख्या में लोग पूजा अर्चना करने बाबाधाम आते हैं। इस दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु बिहार के राजगीर में पूजा करने के बाद पूजा अर्चना करने के बाद यहां आते हैं। वहां से यहां आने के बाद बाबाधाम में पूजा करते हैं।

पुरुषोत्तम मास में बन रहे खास दुर्लभ संयोग

इस वर्ष अधिक मास के दौरान विशेष ज्योतिषीय संयोग भी बन रहे हैं। सामान्यतः एक महीने में केवल एक ही पुष्य नक्षत्र आता है, लेकिन इस बार अधिक मास में दो गुरु पुष्य योग बन रहे हैं। पहला योग मई के अंत में और दूसरा जून में पड़ेगा।

यह संयोग आध्यात्मिक साधना और पूजा-पाठ के लिए बेहद शुभ माना जाता है। जिसमें दान पुण्य व विशेष भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इससे विशेष लाभ की प्राकृति होती है।

मलमास में नहीं किया जाता मांगलिक कार्य

  • इस समय विवाह करने से वैवाहिक जीवन में बाधाएं आ सकती हैं।
  • गृह प्रवेश या घर की नींव रखने के लिए यह समय उचित नहीं माना जाता।
  • बच्चों के जनेऊ संस्कार भी इस अवधि में नहीं किए जाते।
  • नए व्यापार, दुकान या शोरूम शुरू करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।

मलमास को भगवान श्रीहरि विष्णु की भक्ति के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। इस पूरे महीने विष्णु पूजा, व्रत और मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है।

“ओम नमो भगवते वासुदेवाय” और “विष्णवे नमः” जैसे मंत्रों का नियमित जाप करने से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति मिलती है सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

मलमास या अधिक मास

पुरुषोत्तम मास हर तीन साल में सौर और चंद्र कैलेंडर के बीच के दिनों के अंतर लगभग 11 दिन को संतुलित करने के लिए आता है। यह एक अतिरिक्त 13वां महीना है, जो मुख्य रूप से भगवान विष्णु की पूजा, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए समर्पित होता है, जिसमें नए मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।