कंचन सौरव मिश्रा, देवघर। कांवड़िया पथ पर एक महिला दंड देते हुए धीरे-धीरे सुल्तानगंज से बाबाधाम की ओर बढ़ रही हैं। 105 किलोमीटर की इस कठिन दंड यात्रा को पूरा कर पाना आसान नहीं है। कलेजे के बल इतना लंबा सफर। हम आप महज पैदल चलने में हांफ जाते हैं पर इस भक्तिन के इस हौसले का जवाब नहीं। उनकी आंखों में अजीब चमक है। चेहरे पर जरा भी थकान नहीं।

बताती हैं कि बाबा भोले की आराधना में थकान कैसी? बस मन में दृढ़ संकल्प हो। रास्ते में एक जगह उनकी आंख में धूल चली गई तो उन्होंने पास से गुजर रही तीन छात्राओं को आवाज दी। उनमें से एक छात्रा ने उनकी आंख से धूल के कण को बाहर निकाला तो उन्होंने उन बच्चियों को मन से आशीर्वाद दिया। महिला से प्रभावित उन छात्रों ने भी लगे हाथ शिव की इस भक्त का पांव छूकर आशीर्वाद ले लिया। इस दौरान मौका मिलते ही जब उनके बारे जानने का प्रयास किया तो मुख पर हल्की सी मुस्कान के साथ उन्होंने अपना नाम कृपा नंदनी मां बताया। वे मध्य प्रदेश के रीवा से आई हैं।

साध्वी ने बताया कि वे पहले बाबाधाम की कांवड़ यात्रा कर चुकी हैं। लेकिन, छह वर्ष से उन्होंने अपनी यात्रा रोक दी थी। फिर एक दिन बाबा भोले की प्रेरणा से दंड यात्रा पर निकल पड़ी। 18 मार्च को उन्होंने अपनी दंड यात्रा शुरू की थी और अभी जिलेबिया मोड़ से आगे पहुंच चुकी हैं। कुछ दिनों में वह अपनी मंजिल पा लेंगी। उन्होंने बताया कि एक समय छोटे से रास्ते को तय करने में उन्हें चार दिन का लंबा समय लग गया। उस वक्त लगा कि ये यात्रा पूरी नहीं होगी। फिर बाबा भोले ने शक्ति दी और वे लगातार आगे बढ़ रही हैं।

उनकी कोई मन्नत नहीं है, वह तो बाबा भोले के आदेश पर दंड दे रही हैं। बताया कि उन्होंने बाबा बासुकिनाथ, वैष्णो देवी, वृंदावन के गिरिराज जी के दरबार व कामतानाथ चित्रकूट में भी दंड देकर पहुंच चुकी हैं। भगवान का आशीर्वाद उनके पास है, जो उन्हें इस कठिन तप को पूरा करने में सहयोग करता है। एक और दंड देते हुए साध्वी बाबाधाम की ओर बढ़ चलीं..।

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Posted By: Sachin Mishra

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