देवघर, जेएनएन। यह बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर है। सब पर कृपा बरसाने वाले भगवान भोलेनाथ का दरबार। आज से यहां श्रावणी मेले का आगाज हो गया है। पूरे एक महीने तक चलने वाले इस महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। बाबा बैद्यनाथ का आंगन कांवड़ियों के आने की आस में सज गया है।

सुल्तानगंज से बाबाधाम तक 105 किमी की कांवड़ यात्रा में झारखंड के दस किमी की सुविधा दो साल में कुंभ मेला, तिरूपति बाला जी पैटर्न, वैष्णो देवी सिस्टम को एक सूत्र में बांधकर उसी तर्ज पर इतनी बढ़ी है कि कांवड़ियों को यहां आने के बाद सुकून मिलेगा। अरघा से जलार्पण व वन वे क्यू सिस्टम ने मेला को किसी भी दुर्घटना की आशंका को निमरूल कर दिया है। भीड़ नियंत्रण का विशेष इंतजाम किया गया है।

सिस्टम को विकसित करने में कई परिवर्तन भी किए गए हैं। देवघर झारखंड का आईना है और यहां देश-विदेश से यात्री आते हैं सो, शहर को विशेष तौर से मोमेंटम झारखंड की तरह सजाया गया है, स्पाइरल लाइट शहर व कांवरिया पथ को रौशन कर रहे हैं।आरसी सिन्हा की रिपोर्टः

2017 की नई व्यवस्था टेंट सिटी

2016 में मेला का सफल संचालन हुआ, कुछ कमियां महसूस की गईं। श्राईन बोर्ड के अध्यक्ष मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यात्रियों की सुविधा को लेकर उन सारे प्रस्तावों को हरी झंडी दी जो थके हारे यात्रियों को सुकून देने वाला था। तीन प्वाइंट पर टेंट सिटी बनाई गई है। होटल की तरह यहां आराम करने की सुविधा दी गई है जो पूरी तरह निश्शुल्क है। बाघमारा बस स्टैंड में 1280, जसीडीह बस स्टैंड में 300, कांवरिया पथ देवपुरा में 950 डबल बेड लगाए गए हैं। शौचालय, पेयजल के साथ साथ सुरक्षा प्रहरी की तैनाती की गई है। दिन में तीन-तीन घंटा ही रहने दिया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोगों का विश्रम हो सके। लेकिन रात में यहां पहुंचने वालों को सीट रहने पर विश्रम करने दिया जाएगा।

पहली बार क्यू कांप्लेक्स से गुजरेंगे कांवड़िया

क्यू कांप्लेक्स तो 2018 तक बनकर तैयार हो जाएगा। इस साल एक तल का छह कमरा उपयोग में ले लिया गया है। यह तिरूपति पैटर्न को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह टाइम स्लाट सिस्टम को सफल बनाने में कारगर होगा। 2017 में छह कमरा में बैरिकेडिंग कराई गई है, जिसमें चार से पांच हजार कतारबद्ध हो पाएंगे। हर साल यहां आने वालों को एक नयापन दिखेगा। नेहरू पार्क से प्रवेश करने के बाद भक्त क्यू कांप्लेक्स आएंगे, यहां से फूटओवर ब्रिज के रास्ते संस्कार मंडप उसके बाद बाबा को अरघा से जलार्पण करेंगे।

खिजुरिया से ही शेड

नई व्यवस्था में यह प्रयास किया गया है कि देवघर पहुंचते ही हर एक भक्त को शेड में रखा जाए। कांवड़िया पथ खिजुरिया से ही शेड बना दिया गया है, जो 2016 तक शिवगंगा से शुरू होता था। 10 किमी में 94 इंद्रवर्षा 256 शौचालय 156 स्नानागर बनाए गए हैं। 239 सीसीटीवी से मेला क्षेत्र पर नजर रखी जाएगी।

बाबा मंदिर में नया फुटओवर

एक फुटओवर तो पहले से बना है जो संस्कार मंडप के रास्ते बाबा मंदिर के गर्भगृह तक जाता है। बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर प्रांगण स्थित उमा भवन से पार्वती मंदिर तक आने के लिए नया फुटओवर बनाया गया है, जो 10 जुलाई से उपयोग में होगा। मानसिंघी से मंदिर तक बना फुटओवर की मरम्मत कराई गई है, चूंकि इसमें कंपन की शिकायत आ रही थी। 

16 थानों से होगा मेला का नियंत्रण 
बीते साल से यह व्यवस्था लाई गई है। मेला क्षेत्र को 23 थाना में बांटकर रखा गया है जिसमें 7 यातायात थाने बनाए गए है। कांवड़िया पथ दुम्मा से लेकर खिजुरिया के बीच पांच थाना हर एक किमी पर बनाए गए हैं। इसी तरह बाबा मंदिर से लेकर कुमैठा के बीच जगह जगह थाना की अधिसूचना जारी हो गयी है। यहां एक सीनियर मैजिस्ट्रेट एवं डीएसपी रैंक के आफिसर की प्रतिनियुक्ति की गई है। इनके क्षेत्र में रहने वाले यात्रियों की सुविधा व सुरक्षा का सारा जिम्मा थाना में पदस्थापित पदाधिकारी की होगी। यातायात नियंत्रण को लेकर बनाए गए सात थाना में भी वरीय पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति है।

बीते साल से यह व्यवस्था लाई गई है। मेला क्षेत्र को 23 थाना में बांटकर रखा गया है, जिसमें 7 यातायात थाने बनाए गए है। कांवड़िया पथ दुम्मा से लेकर खिजुरिया के बीच पांच थाना हर एक किमी पर बनाए गए हैं। इसी तरह बाबा मंदिर से लेकर कुमैठा के बीच जगह जगह थाना की अधिसूचना जारी हो गई है। यहां एक सीनियर मैजिस्ट्रेट एवं डीएसपी रैंक के आफिसर की प्रतिनियुक्ति की गयी है। इनके क्षेत्र में रहने वाले यात्रियों की सुविधा व सुरक्षा का सारा जिम्मा थाना में पदस्थापित पदाधिकारी की होगी। यातायात नियंत्रण को लेकर बनाए गए सात थाना में भी वरीय पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति है।

भीड़ नियंत्रण को विशेष इंतजाम

सिस्टम को बेहतर कर दिया गया है। हदहदिया से बीएन झा पथ को जोड़ने वाली दस फीट की सड़क का कायाकल्प हो गया है। कल तक वह संकीर्ण व कीचरयुक्त हुआ करता था आज पथ निर्माण विभाग ने उसकी सूरत ही बदल दिया है। प्रशासन ने इसका इस्तेमाल भीड़ नियंत्रण के दृष्टिकोण से किया है। इस पर एक कतार लगी करती थी। इस साल पांच कतारें होंगी।

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Posted By: Sachin Mishra

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