करौं (देवघर) : एनजीटी की पाबंदी के बाद भी करौं में इन दिनों अवैध तरीके से बालू का खनन कर व्यवसाय किया जा रहा है। खास बात यह कि दैनिक जागरण लगातार अवैध खनन को लेकर खबर प्रकाशित कर रहा है इसके बावजूद खनन विभाग व स्थानीय प्रशासन मौन है। इन दिनों प्रखंड के डहुआ घाट, भलगढ़ा घाट, मदनकट्टा घाट, बिरेनगड़िया घाट से बालू का अवैध खनन जारी है।

करौं के अलावा करमाटांड़, सारठ समेत कई क्षेत्रों में ट्रैक्टरों का जमावड़ा लगा रहता है। सबसे अधिक अवैध बालू का उठाव मदनकट्टा रेलवे पुल के आसपास से किया जाता है। अल सुबह से लेकर देर रात तक ट्रैक्टरों की आवाजाही लगी रहती है। ट्रैक्टरों के आवागमन के कारण कई सड़कों पर आमजनों का चलना मुश्किल हो गया है। बताया जाता है कि शौचालय निर्माण, प्रधानमंत्री आवास निर्माण समेत अन्य योजनाओं के नाम पर बालू का उठाव किया जाता है और इसका इस्तेमाल दूसरे काम में हो रहा है। जनकल्याणकारी विकास योजनाओं की आड़ में अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है। इस धंधे से जहां कारोबारी मालामाल हो रहे हैं, वहीं सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। आलम यह है कि विभिन्न घाटों पर दबंग किस्म के लोगों द्वारा टैक्स वसूला जाता है।

लीज घाट से नहीं होता बालू का उठाव :

प्रखंड के बदिया पंचायत के अंबाटील्हा, तेतरियाटांड़ व सगरभंगा गांव स्थित बगडोरो नदी घाट का लीज पंचायत को दिया गया है। इसके लिए मुखिया व पंचायत सचिव द्वारा रसीद काटा जाना है। एक ट्रैक्टर बालू के लिए सौ रुपये की रसीद कटवानी पड़ती है, लेकिन इन घाटों से बालू का उठाव नहीं होता है। कारण इन घाटों से बालू उठाव करने पर व्यवसायियों को पैसा देना पड़ेगा।

बालू के अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए जल्द ही छापेमारी अभियान चलाया जाएगा। किसी भी सूरत में अवैध धंधा नहीं चलने दिया जाएगा।

- राजेश टुडू, थाना प्रभारी, करौं

Posted By: Jagran

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