मिलावटखोरों पर भारी पड़ रहे थे देवघर के खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी, सरकार ने किया निलंबित
देवघर में श्रावणी मेला 2026 के दौरान मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने वाले खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी राजेश कुमार शर्मा को निलंबित कर दिया गया है।

देवघर श्रावणी मेला में पेड़े की जांच करते खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी। (फोटो जागरण)
HighLights
देवघर के खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार शर्मा निलंबित।
श्रावणी मेला में मिलावटखोरों पर कार्रवाई के बाद निलंबन।
निलंबन से खाद्य सुरक्षा अभियान पर असर की आशंका।
जागरण संवाददाता, देवघर। झारखंड के देवघर में श्रावणी मेला-2026 में मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी संभाल रहे खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी राजेश कुमार शर्मा को झारखंड सरकार ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन से संबंधित आदेश स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से अधिसूचना जारी कर दिया गया है।
सरकार के उप सचिव द्वारा जारी आदेश में कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने के मामले में शर्मा को निलंबित किया गया है। साथ ही, उन पर लगाए गए आरोपों को लेकर विभागीय कार्यवाही अलग से की जाएगी। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, नेपाल हाउस, रांची किया गया है।
गिरिडीह के खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी को मिला प्रभार
वहीं, गिरिडीह-वन के खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी सुबीर रंजन को देवघर-वन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। शर्मा के निलंबन के बाद देवघर में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। स्थानीय लोग और श्रद्धालु भी इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं। चर्चा है कि मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना राजेश कुमार शर्मा पर भारी पड़ गया।
हालांकि, इन चर्चाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। कुछ लोगों का आरोप है कि मिलावटखोरों ने अपनी पहुंच, पैरवी और प्रभाव का इस्तेमाल कर शर्मा के खिलाफ कार्रवाई कराने का दबाव बनाया।
निलंबन से गया गलत संदेश
राजेश कुमार शर्मा के निलंबन से देवघर में अच्छा संदेश नहीं जाने की भी चर्चा है। लोगों का कहना है कि इस कार्रवाई से यह संदेश जा सकता है कि मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से पहले अधिकारी कई बार सोचेंगे। दूसरी ओर, यदि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हुई तो देवघर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
श्रावणी मेला के दौरान आने वाले शिवभक्तों सहित स्थानीय लोगों को शुद्ध, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही थी। राजेश कुमार शर्मा ने भी मिलावटखोरी के खिलाफ अभियान चला रखा था। इस दौरान बड़े और नामचीन प्रतिष्ठानों को भी नहीं छोड़ा गया और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की गई।
पेड़ा और मिलावटी खाद्य सामग्री के खिलाफ की थी बड़ी कार्रवाई
प्रसाद के नाम पर मिलावटी पेड़े की बिक्री करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। इसके अलावा मिलावटी हल्दी, स्टार्चयुक्त पनीर और एक्सपायरी एनर्जी ड्रिंक्स को बड़े पैमाने पर नष्ट कराया गया। बताया जा रहा है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई से कई दुकानदारों में भी हड़कंप था। कार्रवाई की भनक लगते ही कुछ दुकानदार प्रतिष्ठान बंद कर वहां से चले जाते थे।
चर्चा इस बात की भी है कि जब सरकार खाद्य सुरक्षा को लेकर इतनी संवेदनशील है तो खाद्य मानकों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारी पर ही कार्रवाई क्यों की गई? क्या स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों का दबाव था? हालांकि, इन सवालों का जवाब विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
13 हजार किलोग्राम से अधिक एक्सपायरी आटा किया था जब्त
बताया जा रहा है कि खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी की कार्रवाई के दौरान 13 हजार किलोग्राम से अधिक एक्सपायरी आटा और बेसन जब्त किया गया। संबंधित कंपनी को इसे वापस लेने के लिए भी कहा गया। इसके अलावा करीब 200 किलोग्राम मिलावटी पेड़े को नष्ट कराया गया और जहां से इसे लाया गया था, वहां वापस भेजवाया गया। मिलावटी हल्दी, स्टार्चयुक्त पनीर और एक्सपायरी एनर्जी ड्रिंक्स को भी नष्ट कराया गया।
इतना ही नहीं, बिना निबंधन संचालित 182 खाद्य प्रतिष्ठानों का निबंधन कराया गया। खाद्य सुरक्षा विभाग की इस कार्रवाई से खाद्य कारोबारियों के बीच भी हड़कंप मचा हुआ था।
अब राजेश कुमार शर्मा के निलंबन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि श्रावणी मेला जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए चलाए जा रहे अभियान पर इसका क्या असर पड़ेगा। साथ ही, विभागीय जांच में निलंबन के पीछे लगाए गए आरोप कितने सही साबित होते हैं, यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा।
