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देवघर में करोड़ों के पुल का गार्डवाल उद्घाटन से पहले धंसी, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

Published: Tue, 22 Sep 2026 03:54 PM (IST)

सारठ प्रखंड के पलमा पंचायत में 3.25 करोड़ की लागत से बने पुल का गार्डवाल उद्घाटन से पहले ही ढह गया और एप्रोच पथ में दरार आ गई।

गार्डवाल धंसी। फोटो जागरण

गार्डवाल धंसी। फोटो जागरण

HighLights

  1. सारठ में 3.25 करोड़ के पुल का गार्डवाल उद्घाटन से पहले ढहा।

  2. एप्रोच पथ में भी दरारें आईं, ग्रामीणों ने घटिया निर्माण का आरोप लगाया।

  3. एक गार्डवाल ठीक करते ही दूसरा धंसने लगा, जांच की मांग।

अनुज भोक्ता, सारठ, (देवघर)। पुल और सड़क निर्माण में मानकों का ध्यान रखना बेहद जरुरी है। क्योंकि बुनियादी संरचना की मजबूती पर ही योजना कितनी टिकाऊ है ये निर्भर करती है।

निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी करना केवल सरकारी राशि के नुकसान का कारण नहीं बनती है बल्कि बड़ी हादसे का भी कारण बन सकती है, लेकिन विभागीय अधिकारी एवं संवेदक के मनमानी के चलते करोड़ों की लागत से बने पुल का गार्डवाल उद्घाटन के पहले ही धंस जा रहा है तथा एप्रोच पथ में भी दरार आ जा रही है जो जांच का विषय है।

जागरण पड़ताल के दौरान सारठ प्रखंड के पलमा पंचायत में बने पुल एवं एप्रोच पथ निर्माण में भारी अनियमितता सामने आई है। पंचायत में आमडंगाल से कुशमाहा के बीच जोरिया में करीब 3.25 करोड़ की लागत से आठ माह पूर्व नवनिर्मित पुल का गार्डवाल उद्घाटन के पूर्व ही धंस गया।

इसके साथ ही एप्रोच पथ में भी दरार आ गई है। दैनिक जागरण में 13 सितंबर के अंक में शीर्षक उद्घाटन के पहले ही 3.25 करोड़ के पुल के गार्डवाल में दरार प्रमुखता से प्रकाशित किया गया।

जिसके बाद विभाग के अभियंता के निर्देश पर संवेदक ने एक और गार्डवाल को तोड़कर नए सिरे से निर्माण कार्य शुरु कराया है, लेकिन अब दूसरी ओर का गार्ड वाल भी धंसने के कगार पर आ गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरु होने के दौरान ही निर्माण कार्य में मानक का ख्याल नहीं रखने, घटिया सामग्री का प्रयोग करने, कार्य स्थल पर प्रयोगशाला स्थापित नहीं करने जैसे कई गंभीर आरोप लगाते हुए कार्यपालक अभियंता मुख्य अभियंता से लेकर उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत किया था, लेकिन अधिकारी द्वारा जनता के शिकायत की अनदेखी की गई। जिसका परिणाम उक्त पुल पर वाहनों के परिचालन के बिना ही गार्डवाल ढह रही है तथा एप्रोच पथ में दरार आ गई है।

इतनी बड़ी अनियमितता उजागर होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रही है। कहा जाता है कि पुल निर्माण सिर्फ दो किनारों को नहीं, बल्कि आर्थिक समृद्धि और रोजगार के नए रास्ते खोलता है, जिससे लोगों को रोजगार मिलने का अवसर मिलता है तथा क्षेत्र का विकास होता है, लेकिन भ्रष्ट अधिकारी एवं संवेदक की मनमानी के चलते करोड़ों की लागत से बनी पुल और सड़क भ्रष्टाचार के कब्रगाह में समाते जा रहा है। योजना में ऐसे अनियमितता करने वाले अधिकारी एवं संवेदक पर समुचित कार्रवाई होनी चाहिए़।

ग्रामीणों का कहना है कि पुल के उस पर जब एक इंच सरकारी जमीन नहीं है तो फिर इतनी बड़ी लागत से पुल बनवाने की जरूरत क्या थी। संवेदक ने जमाबंदी रैयत से मैनेज करके सिर्फ एप्रोच पथ बनाने के लिए जमीन लिया गया है।

बताया कि जनकल्याणकारी के उद्देश्य से उक्त पुल का निर्माण नहीं कराया गया है। सिर्फ ठेकेदारी बंदरबांट के लिए पुल का निर्माण कराया गया है। उक्त पुल से सिर्फ एक गांव के ग्रामीणों को लाभ होगा।

गार्डवाल का काम नए सिरे से कराया जा रहा है। दूसरे और के गार्डवाल का भी निरीक्षण कर उसे भी दुरुस्त कराया जाएगा। संवेदक को अभी समुचित भुगतान नहीं किया गया है। -गोपाल पासवान, विभाग के सहायक अभियंता