सारठ : बिहार के बांका जिला के मत्स्य पदाधिकारी समेत तीन सदस्यीय टीम ने सारठ प्रखंड के कुकराहा पंचायत स्थित सिकटिया अजय बाराज में मछली उत्पादन के लिए लगाए गए केज कल्चर प्रोजेक्ट का जायजा लिया। मत्स्य पदाधिकारी केके सिन्हा ने कहा कि बांका जिला में कई बड़े-बड़े डैम हैं। अभी तत्काल बेलहर प्रखंड के बदुवा जलाशय जिसका रकवा 600 हेक्टेयर में है, उसमें केज कल्चर प्रोजेक्ट लगाने के लिए विभागीय स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसी संदर्भ में विभाग के अधिकारी तथा केज पद्धति में शामिल मत्स्य पालकों से जानकारी लेने आए हैं। बांका डीएफओ के अलावा टीम में मत्स्य विशेषज्ञ शिवनारायण शर्मा तथा बदुवा डैम के बंदोबस्त धारक धनंजय मंडल शामिल थे। देवघर जिला के मत्स्य पदाधिकारी प्रशांत दीपक ने टीम को एक बिदु पर जानकारी दी। केज में पल रहे मछली को भी देखा। बिहार की टीम ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि अगर मत्स्य पालक ईमानदारी से मेहनत करें तो क्षेत्र के लोगों को शुद्ध मछली दे सकते हैं और उससे आमदनी कर आत्मनिर्भर भी हो सकते हैं।

बताते चलें कि कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने अजय बाराज के विस्थापितों को रोजगार देने के उद्देश्य से नावाडीह में 64 तथा बन्दरीसोल में 35 केज तथा हेचरी लगावाया है। एक-एक केज में पांच हजार मछली रखा जाता है। जिसमें तीन से चार टन मछली उत्पादन करने का लक्ष्य है।

जलकुंभी साफ करने का निर्देश : मत्स्य पालकों के रख-रखाव के अभाव में केज के आसपास काफी मात्रा में जलकुंभी हो गया है। जिला मत्स्य पदाधिकारी प्रशांत दीपक ने मत्स्य पालक ग्रुप के सचिव सुनीराम हेम्ब्रम, सदस्य आन्नद मुर्मू, सुबल टुडू, मुकेश मुर्मू व सुधीर दास को निर्देश दिया कि पानी में उगे जलकुंभी को साफ करें। बांका के डीएफओ केके सिन्हा ने बताया कि मछली उत्पादन के लिए बाराज काफी उपयुक्त है। इसी के तर्ज पर बांका के बेलहर प्रखंड में बदुवा डैम में केज लगाया जाएगा।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप