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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 24, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

संस्कृत कई भाषाओं की जननी

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Published: Fri, 24 Jun 2016 07:34 PM (IST)

देवघर : देवघर महाविद्यालय में शुक्रवार को संस्कृत विभाग की ओर से सेमिनार का आयोजन किया गया। वर्तमान

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देवघर : देवघर महाविद्यालय में शुक्रवार को संस्कृत विभाग की ओर से सेमिनार का आयोजन किया गया। वर्तमान परिवेश में संस्कृत की उपादेयता विषय पर आयोजित इस सेमिनार में शोधार्थियों ने संबंधित विषय पर अपने आलेख प्रस्तुत किए। इसमें जयनाथ झा, किरण कुमारी, संगीता कुमारी, भारती प्रसाद व निधि प्रसाद शामिल हैं।

इसके पूर्व उद्घाटन करते हुए प्राचार्य डॉ. सीताराम सिंह ने कहा कि संस्कृत कई भाषाओं की जननी है, जरूरत है तो इसके प्रचार-प्रसार की। इसके उत्तरोत्तर विकास के लिए महाविद्यालय प्रशासन प्रयास करेगा। उन्होंने शिक्षकों से भी अनुरोध किया कि संस्कृत को बोधगम्य बनाने की दिशा में काम करें ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें। अध्यक्षता डॉ. भोला मिश्रा ने की तथा संचालन डॉ. अंजू ठाकुर ने किया। मौके पर डॉ. भूपाल वर्मा, डॉ. संजय कुमार, डॉ. राजेश कुमार सिंह व डॉ. एसएन सिंह आदि मौजूद थे।