वरीय संवाददाता, देवघर : संगीत में सुकून की बात हो तो शास्त्रीय संगीत याद आता है। और जब बात शास्त्रीय गायन की हो तो पंडित भीमसेन जोशी की शैली के हुनरमंद उस्ताद राशिद खां याद आते हैं। भागदौड़ व शोर शराबा के बीच शास्त्रीय संगीत के सितारा उस्ताद राशिद खां के गायन ने शनिवार की रात नटराज की नगरी में ऐसा समां बांधा कि लोग महफिल में कब तक रहे उन्हें एहसास ही नहीं हुआ।

हिन्दी विद्यापीठ की ओर से आयोजित संगीत की महफिल तक्षशिला विद्यापीठ के सभागार में सजी। शाम ढलने के साथ संगीत की लहर उठी जो रात ढलने के साथ खुशनुमा होती गयी।

कई पुरस्कारों से नवाजे गए उस्ताद ने अपनी गायकी की शुरुआत ठुमरी से की। बातों-बातों में बीत गई रात, सजन तुम रुठ गए बोलो ना..। शास्त्रीय संगीत की यह खासियत है कि एक ही बात को कई अंदाज में कहा जाता है, यही अंदाज संगीत का घराना बताता है। फिर परोसा पिया नहीं आए.., बात इतने से नहीं बनी तो दर्द को शब्दों में पिरोकर एक अलग अंदाज में हो याद पिया की आए, ये दुख सहा न जाए, बाली उमरयिा सुन री सजनियां यौवन बीत न जाय हाय राम याद पिया की आए..। यकीन करिये राशिद खां को सुनना एक सुखद एहसास है।

शास्त्रीय दुरुहता को माधुर्य देने की कला भी राशिद खां साहब में है। फिल्म जब वी मेट के गीत से रातों रात अंतरराष्ट्रीय फलक पर धूमकेतु बनकर चमकने वाले राशिद खां ने ज्यों ही गाना शुरू किया, आओगे जब तुम साजना, अंगना फूल खिलेंगे। बरसेगा सावन, बरसेगा सावन झूम-झम के दो दिल..। पूरा सभागार झूमने लगा। हालांकि कार्यक्रम के बाद बातचीत में उस्ताद राशिद खां ने इस बात से इन्कार किया कि उनकी पहचान आओगे जब तुम साजना से है। कहा कि वह छह साल की उम्र से संगीत से जुड़े हैं। रामपुर सखरी घराना के उस्ताद ने एक सवाल के जवाब में कहा कि शास्त्रीय गायन कभी भी कमजोर नहीं हुआ और ना होगा। इसके कद्रदान केवल शहरों में ही नहीं बल्कि कस्बों में भी लाखों की तादाद में हैं। लेकिन इस बात से इन्कार नहीं किया कि इसकी महत्ता बरकरार रखने के लिए शास्त्रीय गायन की क्वालिटी से समझौता नहीं करना होगा। यह पूछे जाने पर कि संगीत के आदि गुरु भगवान शंकर की नगरी में आने पर कैसा लगा कहा कि जहां बाबा हैं वहां वे हैं। 19 साल पूर्व भी वे सत्संग के एक कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे। संगीत की महफिल की सुहानी शाम के अंत में आज राधा बृज को चले का खूबसूरत अंदाज में प्रस्तुति किया जिसे सुनने के बाद लोग शास्त्रीय गीत की महक को जेहन में समेटकर अपने घर को लौट गए। विद्यापीठ के व्यवस्थापक केएन झा ने उस्ताद को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। आरंभ में सखरी बेगम मेमोरियल ट्रस्ट एकेडमी आफ उस्ताद राशिद खां के कलाकारों ने लोगों का मनोरंजन किया। जिसमें चिरंजीत भट्टाचार्य, सौमिक बनर्जी, कुमारी व्रमंती सरकार के साथ समुद्र दास, उज्जवल दत्ता, विप्लव मुखर्जी ने संगत किया। कार्यक्रम में उपायुक्त राहुल कुमार पुरवार, एसपी सुबोध प्रसाद, आरके मिशन के सचिव स्वामी सर्वगानंद महाराज समेत शहर के संगीत प्रेमी मौजूद थे।

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