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इटखोरी में मां भद्रकाली का 50 तोला सोने से हो रहा दिव्य शृंगार, मंदिर के खजाने में डेढ़ किलो सोना और 64 किलो चांदी

Published: Mon, 12 Oct 2026 04:35 PM (IST)

चतरा के इटखोरी स्थित मां भद्रकाली मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। माता ...और पढ़ें

माता के दर्शन को लेकर मंदिर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़।

माता के दर्शन को लेकर मंदिर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़।

HighLights

  1. इटखोरी मां भद्रकाली मंदिर में नवरात्र पर श्रद्धालुओं की भीड़।

  2. माता का प्रतिदिन 50 तोला सोने के आभूषणों से भव्य शृंगार।

  3. आभूषण भक्तों के चढ़ावे से बने, मंदिर में डेढ़ किलो सोना।

पंकज सिंह, इटखोरी (चतरा)। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर चतरा जिले के ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल इटखोरी स्थित मां भद्रकाली मंदिर में आस्था और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। नवरात्र के प्रारंभ के साथ ही यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

ब्रह्ममुहूर्त से ही मंदिर परिसर में माता के जयकारे, शंखध्वनि और दुर्गा सप्तशती के मंत्र गूंज रहे हैं। स्थानीय श्रद्धालुओं के अलावा झारखंड के विभिन्न जिलों तथा बिहार और पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में भक्त मां के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

मां भद्रकाली मंदिर की सबसे प्रमुख विशेषता माता का दैनिक भव्य शृंगार है। माता की प्रतिमा को प्रतिदिन करीब 50 तोला सोने के आभूषणों से सजाया जाता है। शृंगार के दौरान माता के सिर पर सोने का मुकुट, गले में हार, कानों में कुंडल और नाक में नथ पहनाई जाती है।

इसके अलावा माता के ऊपर चांदी का बड़ा छत्र भी लगा है। मंदिर के मुख्य पुजारी नागेश्वर तिवारी ने बताया कि माता का शृंगार प्रतिदिन सुबह पूरे वैदिक विधि-विधान, मंत्रोच्चार और परंपरा के अनुसार किया जाता है। उन्होंने कहा कि श्रंगार में उपयोग होने वाले आभूषण भक्तों के चढ़ावे से ही तैयार किए गए हैं।

आभूषणों का रिकॉर्ड मंदिर प्रबंधन समिति के पास सुरक्षित

समय-समय पर श्रद्धालुओं द्वारा माता के चरणों में अर्पित किए गए सोने को जमा कर माता के विशेष आभूषण बनवाए गए। इन्हीं गहनों से रोजाना माता की सज्जा की जाती है।श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मां भद्रकाली से सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है।

मन्नत पूरी होने या परेशानी दूर होने पर भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार माता को सोने-चांदी के गहने चढ़ाते हैं। मंदिर प्रबंधन के अनुसार अब तक मंदिर के खजाने में करीब डेढ़ किलो सोना और 64 किलो चांदी जमा हो चुकी है। इन कीमती धातुओं और आभूषणों का पूरा रिकॉर्ड मंदिर प्रबंधन समिति के पास सुरक्षित है।

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