चतरा, संजय शर्मा। शांति के दूत भगवान बुद्ध की चर्चा आते ही इंसान के मानस पटल पर शांतचित्त, धीर-गंभीर, ध्यानमग्न गौतम बुद्ध की छवि सामने आ जाती है। शायद बुद्ध का व्यक्तित्व ऐसा ही था। यही वजह है कि दुनिया भर में आज तक बुद्ध की जितनी भी प्रतिमाएं मिली हैं, वे सभी गंभीर मुद्रा में हैं। लेकिन इटखोरी (चतरा, झारखंड) के ऐतिहासिक मां भद्रकाली मंदिर परिसर के म्यूजियम में स्थित बुद्ध की एक प्रतिमा एक हजार साल से मुस्कुरा रही है। बुद्ध की इस दुर्लभ मुस्कुराती हुई प्रतिमा को पुरातत्व विभाग तथा इतिहासकारों ने स्माइलिंग एवं लाफिंग बुद्धा का नाम दिया है।

प्रतिमा सैंड स्टोन को तराश कर बनाई गई है। आकर्षक कलाकृतियों के बीच सैंड स्टोन पर सिर्फ प्रतिमा का सिर उकेरा गया है। मूर्तिकार ने प्रतिमा का निर्माण इतनी दक्षता से किया है कि प्रतिमा के समक्ष खड़ा होते ही सामने मुस्कुराते हुए बुद्ध नजर आते हैं। झारखंड के स्टेट म्यूजियम के अध्यक्ष डॉ. सरफुद्दीन बताते हैं कि इटखोरी के म्यूजियम में स्थित लाफिंग बुद्धा की प्रतिमा काफी दुर्लभ प्रतिमा है। इसे दुनिया की पहली लाफिंग बुद्धा प्रतिमा कहा जा सकता है।

वहीं, बिनोवा भावे विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. इफ्तिखार आलम ने कहा कि मैंने देश के कई हिस्सों में भ्रमण किया है। जहां तक मेरी जानकारी है, बुद्ध की इस तरह मुस्कुराती प्रतिमा कहीं नहीं है। पुरातत्वविद एनजी निकोसे के अनुसार इस तरह बुद्ध की मुस्कुराती हुई प्रतिमा का कोई संदर्भ अब तक नहीं मिला है। लाफिंग बुद्धा की प्रतिमा पुरातत्वविदों तथा इतिहासकारों के लिए शोध का एक विषय है, क्योंकि बुद्ध के विषय में यह माना जाता है कि अपने जीवन काल में वह काफी गंभीर ही रहे। ऐसे में मुस्कुराते हुए बुद्ध की प्रतिमा के निर्माण के पीछे मूर्तिकार का क्या उद्देश्य रहा होगा इस पर शोध होना ही चाहिए।

Posted By: Sachin Mishra