झारखंड में इको टूरिज्म का प्लान तैयार, पर्यटन स्थलों और झरनों की मैपिंग शुरू
झारखंड में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक स्थलों और वाटरफॉल की मैपिंग शुरू की गई है।

पर्यटन स्थल। फोटो जागरण
HighLights
इको टूरिज्म विकसित करने के लिए पर्यटन स्थलों और वाटरफॉल की मैपिंग।
स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता का ध्यान।
जुलकर नैन, चतरा। पर्यटन की संभावनाओं को नए सिरे से तलाशने और प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन के मानचित्र पर लाने की कवायद शुरू हो गई है। राज्य में इको टूरिज्म को विकसित करने के लिए पर्यटन स्थलों और वाटरफाल की मैपिंग कराई जाएगी।
इसके तहत राज्य के विभिन्न जिलों में मौजूद प्राकृतिक, ऐतिहासिक एवं दर्शनीय स्थलों की पहचान कर उनका विस्तृत विवरण तैयार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों की टीम संभावनाओं का अध्ययन कर रही है। राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे प्राकृतिक स्थल मौजूद हैं, जो अब तक व्यापक स्तर पर पर्यटन के मानचित्र पर नहीं आ सके हैं।
जंगल, पहाड़, नदी, झरने और जलप्रपात इको टूरिज्म के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मैपिंग के दौरान ऐसे स्थलों की पहचान के साथ वहां पहुंचने के रास्ते, प्राकृतिक विशेषता, आसपास का क्षेत्र और पर्यटन विकास की संभावनाओं से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है।
इससे चयनित स्थलों का व्यवस्थित विवरण तैयार हो सकेगा। इको टूरिज्म की संभावनाओं को चिह्नित करने के लिए विशेषज्ञों की टीम विभिन्न स्तरों पर काम कर रही है।
टीम पर्यटन स्थलों का अध्ययन कर यह पता लगाने में जुटी है कि किन स्थानों को पर्यटकों के लिए विकसित किया जा सकता है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पर्यटन गतिविधियों की संभावनाओं का भी आकलन किया जा रहा है।
प्रदेश में कई छोटे-बड़े वाटरफाल हैं, जो प्राकृतिक सुंदरता के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। मैपिंग के माध्यम से इन वाटरफाल का भी विवरण तैयार किया जा रहा है।
जलप्रपात की स्थिति, आसपास के प्राकृतिक क्षेत्र और वहां पर्यटन विकास की संभावनाओं को दर्ज किया जाएगा। इससे भविष्य में उपयुक्त स्थलों का चयन कर सुविधाओं के विकास की दिशा में काम किया जा सकेगा।
स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने पर जोर
इको टूरिज्म के विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, खान-पान, आवास एवं गाइड जैसी सेवाओं को बढ़ावा मिल सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आय के नए साधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
इसका उद्देश्य केवल पर्यटन स्थलों को विकसित करना नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता का संरक्षण भी है। इसलिए संभावित स्थलों के विकास में पर्यावरणीय संतुलन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जा रहा है।
मैपिंग से राज्य के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का एक व्यवस्थित आधार तैयार होगा। इसके बाद संभावनाओं के अनुरूप सुविधाओं का विकास कर झारखंड को इको टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकेगा।
इको टूरिज्म को विकसित करने के लिए पर्यटन स्थलों और वाटरफाल की मैपिंग कराई जाएगी। सरकार की अच्छी और नई पहल है। जिलों में मौजूद प्राकृतिक, ऐतिहासिक एवं दर्शनीय स्थलों की पहचान कर उनका विस्तृत विवरण तैयार किया जा रहा है और बाद में उसे विकसित किया जाएगा। इससे पर्यटन विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और रोजगार का सृजन होगा। -राहुल मीना, उत्तरी वन प्रमंडल पदाधिकारी, चतरा।
