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चतरा में 60 घंटे बाद खत्म हुआ धरना: प्रशासन-प्रदर्शनकारियों के बीच बनी सहमति, CRPF जवान की मौत पर फूटा था गुस्सा

By ZULQAR NAINEdited By: Shashank Baranwal
Published: Sun, 12 Jul 2026 07:31 AM (GMT+05:30)

चतरा-सिमरिया मार्ग पर सीआरपीएफ जवान की मौत के विरोध में 60 घंटे से जारी आंदोलन प्रशासन से समझौते के बाद समाप्त हो गया।

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HighLights

  1. चतरा में 60 घंटे से जारी आंदोलन प्रशासन से समझौते के बाद समाप्त।

  2. मृतक सीआरपीएफ जवान के परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजा मिलेगा।

  3. उच्च स्तरीय निर्णय तक कोयला वाहनों के परिचालन पर पूर्ण रोक।

जागरण संवाददाता, चतरा। चतरा–सिमरिया मुख्य मार्ग स्थित देल्हो घाटी में सड़क दुर्घटना में सीआरपीएफ जवान लक्ष्मण कुमार यादव की मौत के विरोध में पिछले करीब 60 घंटे से जारी आंदोलन शनिवार देर रात समाप्त हो गया।

रात लगभग 12:00 बजे प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच लंबी वार्ता के बाद महत्वपूर्ण सहमति बनी, जिसके पश्चात धरना समाप्त करने की घोषणा की गई। इसके साथ ही तीन दिनों से जारी गतिरोध खत्म हो गया और सामान्य वाहनों का परिचालन फिर से शुरू करा दिया गया।

वार्ता के दौरान प्रशासन ने मृतक जवान के स्वजन को 10 लाख रुपये मुआवजा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। सिमरिया अंचल अधिकारी गौरव कुमार राय ने भरोसा दिलाया कि सोमवार तक मुआवजा राशि उपलब्ध करा दी जाएगी। बैठक में सिमरिया थाना प्रभारी अमित कुमार गुप्ता भी मौजूद रहे।

समझौते का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह रहा कि उच्च स्तरीय बैठक में अंतिम निर्णय होने तक चतरा जिले के किसी भी मार्ग पर भारी मालवाहक एवं विशेष रूप से कोयला वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद रहेगा।

प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट निर्णय होने के बाद ही इन वाहनों को मार्ग पर चलने की अनुमति दी जाएगी। इस घोषणा के बाद आंदोलनकारियों ने धरना समाप्त करने पर सहमति जताई। आंदोलन को सांसद कालीचरण सिंह, सिमरिया विधायक कुमार उज्ज्वल दास, झामुमो नेता मनोज चंद्रा, कांग्रेस जिला अध्यक्ष सह जिला परिषद सदस्य चंद्रदेव गोप सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और बड़ी संख्या में ग्रामीणों का समर्थन प्राप्त था। पिछले तीन दिनों से ग्रामीण सड़क पर डटे हुए थे और कोयला वाहनों के परिचालन पर स्थायी समाधान की मांग कर रहे थे।

हालांकि धरना समाप्त होने के बाद सामान्य वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है, लेकिन सड़क के दोनों ओर भारी वाहनों की लंबी कतार अब भी लगी हुई है। प्रशासन इन वाहनों को नियंत्रित तरीके से हटाने की तैयारी में जुटा है।

ग्रामीणों का कहना है कि कोयला परिवहन और बाईपास निर्माण जैसे मुद्दों पर उच्च स्तरीय बैठक में ठोस निर्णय होने के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल समझौते के बाद क्षेत्र में तनाव कम हुआ है, लेकिन लोगों की निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई और किए गए वादों को पूरा करने पर टिकी हैं।

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