संवाद सूत्र, टंडवा (चतरा): एनटीपीसी परियोजना के विरुद्ध भू-रैयतों का आंदोलन निरंतर जारी है।पिछले एक वर्ष से धरना का क्रम जारी है। एक साल के दौरान तीसरी मर्तबा प्लांट का निर्माण कार्य को रैयतों ने ठप करा दिया है तथा आमरण-अनशन जारी है। 28 नवंबर से अनशन का बागडोर महिलाओं ने संभाला है। मुआवजा वृद्धि और दो अन्य मांगों को लेकर यह आंदोलन हो रहा है। विस्थापित विकास संघर्ष समिति के बैनर तले पिछले 15 दिनों से धनंजय सोनी, भीम नारायण ठाकुर, गंगाधर रजक, यदु महतो, नरेश महतो के द्वारा आमरण अनशन कर रहे थे। उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ रही थी, जिन्हें रैयतों ने जूस पिलाकर आराम दिया और अनशन का क्रम जारी रखते हुए पांच महिलाएं अनशन करने का निर्णय लिया। जिनमें कामता गांव निवासी उसमा खातून, रहमनी खातून, कबीला खातून, टंडवा से रूबी देवी और गाडिलौंग गांव कीसेकिरण देवी का नाम शामिल है। अनशन में बैठने वाली महिलाओं ने शपथ लिया कि एनटीपीसी के द्वारा जब तक मांगों को पूरा नहीं की जाएगी, तब तक इसी तरह क्रमवार अनशन चलता रहेगा। विस्थापित नेता धनंजय सोनी ने एनटीपीसी को स्पष्ट रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक एनटीपीसी तीनसूत्री मांग पूरा नहीं करती ,तब तक एनटीपीसी परियोजना का संपूर्ण निर्माण कार्य बंद रहेगा और एनटीपीसी के अधीनस्थ कार्य कर रहे कंपनियों एवं लोकल ठेकेदारों से भी विस्थापित विकास संघर्ष समिति अनुरोध करती है कि एनटीपीसी के पदाधिकारियों के दबाव या बहकावे में आकर कार्य शुरू करने का प्रयास नहीं करें, एनटीपीसी के द्वारा अभी तक किसी प्रकार से कोई वार्ता नहीं हुई है धनंजय सोनी ने आक्रमकता के साथ एनटीपीसी प्रबंधन को स्पष्ट तौर से कहा कि जब तक तिलेश्वर साव जेल से बाहर नहीं आ जाता है तब तक एनटीपीसी से किसी प्रकार का कोई वार्ता या समझौता नहीं करेगी।इस मौके पर समिति के संयोजक कृष्णा साहू, महेश प्रसाद ,जटू गोप, कैलाश यादव, गोविद पासवान, मोगल यादव, किरण साह,संतोषी देवी, जेबुन्निसा ,लीलावती देवी, सुभासो देवी ,जुनेदा खातून आदि सैकड़ों भू रैयत उपस्थित रहे।

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