टंडवा : नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत सीसीएल ने अधिग्रहीत भूमि के बाजार मूल्य का चार गुणा मुआवजा देने का निर्धारण तो कर लिया। परंतु जमीन के एवज में नौकरी देने के मामले में अभी संशय की स्थिति बनी हुई है। जिससे 158 रैयतों की नियुक्ति की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है। बताया गया कि नए भूमि अधिग्रहण कानून बर्ष 2015 के बाद अधिग्रहित होने वाली जमीन पर लागू हो रही है। जिसमें जमीन के बदले नौकरी देने संबंधी स्पष्ट निर्देश नही है। जिससे नौकरी को लेकर रैयतों के लगभग डेढ़ सौ आवेदन सीसीएल के मुख्यालय दरभंगा हॉउस में धूल फांक रहा है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के धनबाद आगमन पर सीसीएल ने शिविर लगाकर आनन-फानन में लगभग 158 रैयतों का नौकरी का आवेदन तो ले लिया, पर उसमें मात्र छह लोगो को नियुक्ति पत्र दिया गया। शेष बचे 150 लोग कार्यालय का चक्कर काटने को विवश हैं। सीसीएल के अधिकारिक सूत्रों की माने तो रैयतों को नौकरी देने में नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम रोड़ा बना हुआ है। इस संदर्भ में सीसीएल द्वारा कोल मंत्रालय से उक्त समस्या के समाधान के लिए सुझाव मांगी है। बताया गया कि जब तक कोल मंत्रालय नए कानून में अपने तरफ सभी रैयतों को नौकरी देने पर अपना मंतव्य नहीं देती तब तक नौकरी देने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती । नाम नहीं छापने के शर्त पर सीसीएल के एक अधिकारी ने बताया कि बर्ष 2015 से पहले अधिग्रहित भूमि पर नौकरी देने में कोई समस्या नहीं है। बहरहाल रैयतों में प्रबंधन के प्रति रोष है ।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस