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WhatsApp मैसेज ने लौटाईं खुशियां; 16 साल बाद घर लौटा लापता पिता, झारखंड की दिल छूने वाली कहानी

By Zulqar NainEdited By: Nishant Bharti
Published: Tue, 23 Jun 2026 09:25 AM (IST)

चतरा के रमेश गंझू 16 साल बाद सोशल मीडिया की मदद से अपने परिवार से मिल गए, जो एक मामूली विवाद के बाद घर छोड़कर चले गए थे।

16 साल बाद घर लौटा रमेश गंझू

16 साल बाद घर लौटा रमेश गंझू

HighLights

  1. चतरा के रमेश गंझू 16 साल बाद घर लौटे।

  2. सोशल मीडिया पर साझा संदेश से परिवार से मिले।

  3. चेन्नई के एनजीओ ने इलाज कर याददाश्त लौटाई।

जागरण संवाददाता, चतरा। तकनीक और मानवीय संवेदनाओं के संगम ने एक बिछड़े परिवार को फिर से जोड़ दिया। इंटरनेट मीडिया पर साझा किए गए एक संदेश ने वह कर दिखाया, जो 16 वर्षों की लंबी तलाश भी नहीं कर सकी। 

चतरा जिले के टंडवा प्रखंड स्थित बेंती गांव निवासी रमेश गंझू आखिरकार अपने परिवार से मिल गए हैं। उनके घर लौटने से पूरे गांव में खुशी का माहौल है। करीब 16 वर्ष पूर्व 45 वर्षीय रमेश गंझू एक मामूली पारिवारिक विवाद के बाद घर छोड़कर चले गए थे। 

उनकी पत्नी मुन्ना देवी और दो बेटों ने वर्षों तक उनकी तलाश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। समय बीतने के साथ परिवार की उम्मीदें भी धुंधली पड़ने लगी थीं। 

चेन्नई से मिले रमेश गंझू

इसी बीच 18 जून को स्वयंसेवकों के एक इंटरनेट मीडिया समूह में साझा किए गए संदेश ने नई उम्मीद जगाई। दरअसल, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और नशे की लत से जूझते हुए रमेश वर्षों तक विभिन्न शहरों में भटकते रहे। अंततः चेन्नई के पूनामल्ली क्षेत्र में उन्हें बेघर अवस्था में पाया गया। 

इलाज के दौरान लौटी याददाश्त

चेन्नई की गैर-सरकारी संस्था ‘उदवुम करंगल’ के स्वयंसेवकों ने 16 जून को उन्हें अपने पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया। संस्था से जुड़े समाजसेवी श्रीनिवास राव के अनुसार, रमेश को चिकित्सकीय एवं मनोचिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया गया। 

उपचार के दौरान उनकी स्मृतियां धीरे-धीरे लौटने लगी और उन्होंने झारखंड से अपने संबंधों की जानकारी दी। इसके बाद स्वयंसेवकों ने उनकी तस्वीर विभिन्न व्हाट्सएप समूहों में साझा की। यह तस्वीर बेंती के पड़ोसी गांव कल्याणपुर की एक किराना दुकान तक पहुंची। 

चेन्नई में ही काम करता था बेटा

दुकानदार ने तस्वीर देखते ही रमेश को पहचान लिया और तत्काल उनके स्वजनों को सूचना दी। इसके बाद जो तथ्य सामने आया, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। रमेश का बड़ा बेटा नागेश्वर भी चेन्नई के बाहरी इलाके में काम कर रहा था और वह पुनर्वास केंद्र से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर रह रहा था। बावजूद इसके दोनों को एक-दूसरे की मौजूदगी की जानकारी नहीं थी। 

सूचना मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर पिता और पुत्र का भावुक मिलन हुआ। 21 जून को रमेश अपने पैतृक गांव लौट आए। वर्षों बाद पति को अपने सामने देखकर पत्नी मुन्ना देवी की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि उनकी प्रार्थनाएं आखिरकार रंग लाई हैं। 

वहीं, पिता के घर छोड़ने के समय मात्र पांच वर्ष के रहे नागेश्वर ने कहा कि पिता की वापसी उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी है। इस पूरे घटनाक्रम ने साबित कर दिया कि तकनीक का सकारात्मक उपयोग केवल सूचनाओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि वह बिखरे हुए रिश्तों और जीवनों को भी फिर से जोड़ने की ताकत रखता है।

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