बोकारो : एसबीआइ लॉकर कांड के दौरान चोरी किए गए गहने को वापस लेने के लिए ग्राहकों को इस बात का प्रमाण देना होगा कि वह गहना उनका ही है। साथ ही चोरों से बरामद वैसा सोना जो कि गला दिया गया है और जिसकी पहचान नहीं हो सकती है। उसे ग्राहकों को लेना व पुलिस के लिए देना भी संभव नहीं हो सकेगा। चूंकि उसकी पहचान संभव नहीं है। बोकारो व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता आनंद व‌र्द्धन ने बताया कि लॉकर कांड में बरामद गहनों की पहचान करने वाले ग्राहकों को अदालत से इसे रिलीज करना होगा। बरामद गहनों को मुक्त कराने के लिए ग्राहकों को पहले ऑनरशीप प्रूफ करना होगा। इसके लिए ग्राहकों को अदालत में गहनों को खरीदने के कागजात से लेकर फोटो या फिर अन्य प्रमाण देना होगा। अगर एक ही गहने के दो दावेदार सामने होंगे तो सिविल कोर्ट उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दावा उस ग्राहक के पक्ष में मंजूर करेगा जिसके पक्ष में साक्ष्य मजबूत होंगे। बताया कि जिन गहनों को गलाकर उसकी पहचान समाप्त कर दी गई है, उसके मुक्त कराने में मुश्किलें सामने आएंगी। जब पहचान ही सुनिश्चित नहीं हो पाएगी तो अदालत ऐसे गहनों को मुक्त नहीं कर पाएगी।

------------------------लॉकर कांड में बरामद गहनों की बचे हुए ग्राहकों ने की पहचान

बोकारो : लॉकर कांड में बरामद गहनों की पहचान करने आधा दर्जन ग्राहक रविवार को सिटी थाना पहुंचे। अभी तक इस मामले में पहले ही 55 से अधिक ग्राहकों से बरामद गहनों की पहचान पुलिस करवा चुकी है। कुछ ग्राहक बाहर थे तो पुलिस ने उन्हें थाना आकर गहनों की पहचान करने का अनुरोध किया था। बाहर गए ग्राहक लौटे तो इनसे बरामद गहनों की पुलिस ने पहचान कराई। चार ने अपने गहनों की पहचान की। वहीं बाकी ने कहा कि उनके गहनों जैसे बरामद गहने दिख रहे हैं। बता दें कि बीते वर्ष 25-25 दिसंबर की रात भारतीय स्टेट बैंक की एडीएम बि¨ल्डग शाखा के 72 लॉकरों से चोर 11 करोड़ रुपये से अधिक का सोना नकदी व अन्य गहने चोरी कर लिए थे। पुलिस चोरों के पीछे पड़ी तो कुख्यात हसन चिकना समेत इसके गिरोह की संलिप्तता सामने आई। पुलिस चोरी गए गहनों में से आठ करोड़ से अधिक की नकदी व गहने बरामद करने में सफल हुई। कुख्यात चिकना भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

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