करगली (बेरमो) : बेरमो कोयलांचल अंतर्गत पुरनाटांड़ के विस्थापितों ने अपने आंदोलन को नया तेवर दे दिया है। अपनी जमीन पर गुरुवार को ट्रैक्टर चलाकर व बीज डालकर खेती शुरू कर दी। साथ ही कहा कि अब फसल उपजाएंगे, सीसीएल को जमीन नहीं देंगे। इस प्रकार पुरनाटांड़ के विस्थापित अधिगृहित जमीन के एवज सीसीएल से नियोजन, मुआवजा व पुनर्वास पाने को आरपार की लड़ाई लड़ने को आमादा हो गए हैं। विस्थापित दशरथ महतो ने अपनी जमीन को ट्रैक्टर से जोतवाकर धान के बीज डाले। कहा कि सीसीएल प्रबंधन जमीन के एवज पुरनाटांड़ के विस्थापितों को नियोजन, मुआवजा व पुनर्वास देने को तैयार नहीं है। जबकि, सीसीएल के दिशा-निर्देशों का पालन सभी विस्थापित कर रहे हैं। पूर्व में ही कई विस्थापितों ने अपनी जमीन के कागजात सत्यापन कराने के लिए प्रबंधन को सौंप दिया। इसके बावजूद नियोजन, मुआवजा व पुनर्वास की सुविधा नहीं दी गई। इसलिए अब विस्थापितों ने अपनी बंजर भूमि पर पौधे लगाने और खेती योग्य जमीन में फसल लगाने की योजना बनाई है। --प्रबंधन ने अपने वादे को नहीं किया पूरा : विस्थापित लालमोहन यादव ने कहा कि सीसीएल प्रबंधन विस्थापितों को भरोसे में न लेकर जबरन माइंस संचालित कराना चाह रहा है, जिसका पुरजोर विरोध किया जा रहा है। सीसीएल प्रबंधन ने पिछले 36 वर्षों से यहां के विस्थापितों को ठगने का काम किया है। अब विस्थापित अपना अधिकार लिए बगैर खदान को चालू नहीं होने देंगे। कहा कि खदान के लिए अधिग्रहण होने से पहले वह लोग जमीन पर खेती कर दो वक्त की रोटी जुटाते थे। प्रबंधन ने नियोजन, मुआवजा व पुनर्वास देने का आश्वासन देकर जमीन तो अधिग्रहण कर लिया, लेकिन अपने वादे को पूरा नहीं किया।

--अब बीएंडके प्रबंधन जोर-जबरदस्ती को आमादा : विस्थापित चंदन राम ने कहा कि पिछले वर्ष सीसीएल ढोरी प्रक्षेत्र प्रबंधन ने प्रशासन व सीआइएसएफ के बल पर बंद पड़ी माइंस को जबरन चालू करा दिया था। अब बीएंडके प्रबंधन जोर-जबरदस्ती करने को आमादा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। माइंस से महज 50 फीट की दूरी पर पुरनाटांड़ बस्ती के लोग अपने पूरे परिवार के साथ रहने को विवश हैं। पुरनाटांड़ माइंस में ब्लास्टिग होने से बस्ती के लगभग सभी घर जर्जर हो गए हैं। ब्लास्टिग की जद में आ जाने के डर से बच्चे घर के बाहर खेलने से घबराते हैं।