बोकारो : राज्य का एकमात्र जिला बोकारो है जहां छोटे-बड़े चार बिजली संयंत्र हैं। दो संयंत्र दामोदर घाटी निगम के, एक सेल और डीवीसी के संयुक्त उपक्रम के रूप में व चौथा झारखंड सरकार का तेनुघाट थर्मल पावर प्लांट है। बावजूद प्रतिदिन 10 से 12 घंटे बिजली की कटौती आम है। वजह यह है कि बोकारो जिला बिजली के लिए पूरी तरह डीवीसी पर निर्भर है। जिले की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था ट्रांसमिशन लाइन से जुड़ी नहीं है।

पूर्व की सरकार ने चंदनकियारी के बरमसिया व जैनामोड़ में दो पावर ग्रिड का निर्माण कराया। जब तक ग्रिड चालू हो पाता, सरकार का नेतृत्व बदल गया। नई सरकार के आने के बाद समीक्षा बैठक में पहले व दूसरे माह में कहा गया कि जल्द ही ग्रिड चालू होगा। सरकार के दो साल पूरा होने के बाद भी अब तक विभाग ट्रांसमिशन लाइन के एक दर्जन खंभे को खड़ा नहीं कर पा रहा है। ऐसे में झारखंड सरकार चाहे भी तो बोकारो को डीवीसी के अतिरिक्त दूसरे स्थान से बिजली नहीं दे सकती है। इसका उदाहरण फिलहाल देखने को मिल रहा है।

बीते 10 दिसंबर को सूचना मिली कि झारखंड सरकार को 200 मेगावाट सस्ती बिजली मिलनी शुरू हो गई। पर इसका लाभ बोकारो को नहीं मिला।

क्या हैं पेंच :

बरमसिया ग्रिड को चालू करने के लिए पश्चिम बंगाल के कुछ गांवों में 12 से 15 खंभे खड़े करने थे। वह नहीं हो रहा था। चूंकि मामला दो राज्यों का था। जब प्रदेश में नई सरकार बनी तो कहा गया कि सबकुछ ठीक हो जाएगा। इसके लिए चास के तत्कालीन एसडीएम शशि प्रकाश सिंह ने पुरुलिया डीएम से बात भी की और सकारात्मक पहल प्रारंभ हुई। उनके जाने के बाद फिर से मामला लटक गया। अब तक काम नहीं पूरा हुआ।

वहीं जैनामोड़ ग्रिड के रास्ते में वन विभाग की जमीन है। बीते तीन वर्ष से फाइल धूल फांक रही है। अब तक काम करने वाली कंपनी को वन विभाग से अनापत्ति नहीं मिल सकी है। इस बात को लेकर बिजली विभाग के अधिकारियों में असंतोष है। मामले में कोई गंभीर पहल नहीं हो रही है। 2019 की समस्या आज तक पड़ी हुई है। वन विभाग पूरे सिस्टम को हिलने नहीं दे रहा है। इससे न तो खंभा लग रहा है, ना ही ट्रांसमिशन लाइन का काम पूरा हो रहा है।

क्या होगा फायदा :

1. बोकारो जिला सेंट्रल ग्रिड से जुड़ जाएगा।

2. झारखंड सरकार यदि दूसरे राज्य या निजी कंपनी से बिजली खरीदना चाहे तो खरीद सकती है।

3. डीवीसी पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी।

4. बिजली की कटौती के कारण उद्योगों पर पड़ रहे बुरे प्रभाव को रोका जा सकेगा।

5. डीवीसी के पावर प्लांट में खराबी आने पर भी ब्लैक आउट की स्थिति नहीं होगी।

जब तक दोनों ग्रिड चालू नहीं होता है तब तक डीवीसी के अतिरिक्त वैकल्पिक बिजली का इंतजाम नहीं कर सकते। फिलहाल डीवीसी ही एक मात्र बिजली देने वाला है। ग्रिड चालू करने के लिए ट्रांसमिशन लाइन का पूरा होना जरूरी है। जो कि वन विभाग व दूसरे हिस्से में बंगाल प्रशासन के अवरोध के कारण रुका हुआ है। 10 घंटे तक बिजली की कटौती हो रही है। डीवीसी मनमानी कर रहा है।

अखिलेश्वर सिंह, कार्यपालक अभियंता, चास।

Edited By: Jagran