जागरण संवाददाता, बोकारो : राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ झारखंड प्रदेश प्राथमिक प्रकोष्ठ की ऑनलाइन परिचर्चा में नई शिक्षा नीति पर चर्चा हुई। संयोजक आशुतोष कुमार एवं सहसंयोजक विजय बहादुर सिंह ने नई शिक्षा नीति का स्वागत किया। आशुतोष कुमार ने कहा कि 1986 के बाद से शिक्षा की संरचना में आमूल-चूल परिवर्तन है, जिससे देश में गुणात्मक शिक्षा का ज्यादा प्रचार होगा। शिक्षा नीति छात्रों की रूचि के अनुरूप शिक्षा ग्रहण का माध्यम बनेगा।

छात्रों पर बोर्ड का मानसिक दबाव खत्म होगा। प्राथमिक स्तर तक की शिक्षा केवल मातृभाषा, स्थानीय भाषा एवं राष्ट्रभाषा में होगी। इससे छात्रों की भाषाई समझ बढ़ेगी। वर्ग छह से वोकेशनल कोर्स की शुरुआत से बच्चों में तकनीकी कौशल का विकास होगा। दसवीं तक आते-आते छात्र तकनीकी रूप से दक्ष होंगे। उच्च शिक्षा में बदलाव से छात्रों में शोध एवं विकास का अवसर प्राप्त होगा, जिससे देश उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर हो सकता है।

बोकारो जिलाध्यक्ष राघवेंद्र कुमार व जिला महामंत्री कमलेश अग्रवाल ने भी नई शिक्षा नीति को दूरदर्शी एवं उपयोगी बताया। राघवेंद्र कुमार ने कहा कि हमारी वर्तमान शिक्षा व्यवस्था केवल डिग्री धारकों की फौज खड़ा करती है, परंतु उनमें व्यवसाय कौशल का अभाव होता है। छात्रों के समक्ष नौकरी के अलावा कोई और विकल्प नहीं होता है। नई शिक्षा नीति छात्रों की रुचि के अनुरूप कौशल चुनने का अवसर देगी।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ झारखंड प्रदेश प्राथमिक प्रकोष्ठ के संस्थापक विनय कुमार लाल, रीता सिंह, अंजय अग्रवाल, अरुण कुमार दास, निरंजन कुमार, दशरथ प्रधान, सुजीत कुमार आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस