बोकारो: स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) में वेतन पुनरीक्षण का मामला पूरी तरह से उलझता जा रहा है। बुधवार को केंद्रीय इस्पात मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने पे रिवीजन के मसले पर संसद में कहा कि वहनीयता खंड की शर्तो को दूर किये बगैर इसे कंपनी में लागू नहीं किया जा सकता। जबकि सेल में मान्यता प्राप्त श्रमिक संगठन (एनजेसीएस) के सदस्य बीते सात सितंबर वेतन पुनरीक्षण पर नई दिल्ली में प्रबंधन के साथ पहली बैठक करने का दावा कर चुके हैं। ऐसे में इस्पातमंत्री के बयान के बाद यूनियन नेताओं की भूमिका संदेह के घेरे में है। सेल में अधिकारियों का पे रिवीजन 1 जनवरी 2007 तथा कर्मचारियों का 1 जनवरी 2017 से लंबित है। इसे लागू कराने के लिए सेफी व एनजेसीएस के सदस्य काफी प्रयासरत है। लेकिन मामला वहनीयता खंड पर आकर अटक जा रहा है। कंपनी में वेतन पुनरीक्षण के लिए सरकार जस्टिस सतीश चंद्रा के नेतृत्व में थर्ड पे रिवीजन कमेटी का गठन किया था। कमेटी के सदस्यों ने सेल के 2014 से 2017 तक के वार्षिक वित्तीय वर्ष में तीन साल के घाटे को देखते हुए यहां पे रिवीजन नही लागू करने की अनुशंसा सरकार से की थी। जिस पर कैबिनेट कमेटी ने भी अपनी मंजूरी दी थी। साल 2018 के बाद कंपनी पुन: अपने घाटे को पाटने में संभावित स्तर तक पहुंच गई है। इसलिए यहां वेतन पुनरीक्षण की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। सेफी का अपना तर्क है कि अफसरों का पे रिवीजन 10 वर्षों पर होता है। ऐसे में तीन साल के आय-व्यय का मूल्यांकन करना पूरी तरह से गलत है। कंपनी इस तीन साल (2014-17) के पहले व बाद में बेहतर उत्पादन कर सरकार को राजस्व के मद में अच्छी रकम का भुगतान कर रही है। इधर दूसरी ओर सीटू के राष्ट्रीय महासचिव सह एनजेसीएस के वरीय नेता पीके दास का कहना है कि सात सितंबर की बैठक में सेल अध्यक्ष कंपनी के वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए शीघ्र पे रिवीजन करने की बात किये थे। लेकिन वास्तविक तौर पर यह वेतन पुनरीक्षण की मीटिग नहीं थी। आठ दिसंबर को आहूत राष्ट्रव्यापी हड़ताल की मांगों में वेज रिवीजन भी हमारा एक प्रमुख एजेंडा है। मालूम हो कि सेल में पे रिवीजन को लेकर बीजेपी की राष्ट्रीय महामंत्री सह राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय ने सरकार ने जवाब मांगा था। जिस पर वे बुधवार को अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त किये।

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- एचएससीएल में हुआ वेतन समझौता : भारत सरकार की सार्वजनिक लोक उद्यम कंपनी हिन्दुस्तान स्टील वर्कस कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (एचएससीएल) में पे रिवीजन लागू कर दी गई है। इस बाबत अधिसूचना जारी हो गई है। कंपनी में पे रिवीजन साल 1992 से लंबित था। इसके बाद यहां कार्यरत लगभग कई अधिकारी-कर्मचारी योजना से लाभान्वित होंगे। हालांकि वेतन समझौता में 25 अक्टूबर 2019 से पूर्व कंपनी से रिटायर हुए कर्मियों को किसी प्रकार की एरियर का भुगतान पे रिवीजन के मद में उन्हें नही किया जाएगा। अधिकारियों के मामले में ई-0 ग्रेड का अब 30 हजार तथा प्रबंध निदेशक का 1 लाख 80 हजार रूपये न्यूनतम वेतनमान पे रिवीजन के बाद हो गया है।

Posted By: Jagran

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