बोकारो में हाथियों के खिलाफ मोर्चा, आतंकित गांवों को राहत देने उतरी संयुक्त QRT
Jharkhand Elephant Conflict: झारखंड के बोकारो में मानव-हाथी संघर्ष एक गंभीर समस्या है। वन विभाग ने हाथियों को ग्रामीण क्षेत्रों ...और पढ़ें

हाथियों को भगाने के लिए सक्रिय क्यूआरटी टीम के सदस्य।
HighLights
बोकारो में मानव-हाथी संघर्ष रोकने को संयुक्त क्यूआरटी सक्रिय।
हाथियों को भगाने के लिए मशाल, स्प्रे मशीन का उपयोग।
लुगू पहाड़ क्षेत्र में हाथियों के हमले से कई मौतें हुईं।
जनीश प्रसाद, बेरमो (बोकारो)। Jharkhand Elephant Conflict: झारखंड में मानव और हाथियों के बीच टकराव एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। आए दिन हाथियों के झुंड जंगलों से निकलकर गांवों और बस्तियों में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे जनहानि की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड स्थित लुगू पहाड़ क्षेत्र में इन दिनों हाथियों का बसेरा है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों की तुलना में हाथी अधिक समय जंगलों में ही बिता रहे हैं। हाथियों के बढ़ते आतंक को देखते हुए वन विभाग ने उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों से दूर रखने के लिए नई योजना के तहत अभियान शुरू किया है।
वर्तमान में गोमिया, कुजु और पेटरवार की तीन क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीम) संयुक्त रूप से कार्य कर रही हैं। जानकारी के अनुसार, पहले जब रामगढ़ वन क्षेत्र से हाथियों को खदेड़ा जाता था, तो वे गोमिया प्रखंड के लालपनिया, महुआटांड़, गंगापुर सहित रामगढ़ से सटे क्षेत्रों की ओर चले जाते थे।
वहीं, जब लालपनिया और महुआटांड़ की ओर से उन्हें खदेड़ा जाता, तो वे वापस रामगढ़ की ओर लौट जाते थे। इस वजह से दोनों क्षेत्रों में जान-माल का नुकसान होता था। अब रामगढ़ और गोमिया की क्यूआरटी टीमें मिलकर हाथियों को ग्रामीण क्षेत्रों से दूर भगाने का काम कर रही हैं।
यह अभियान प्रतिदिन चलाया जा रहा है। रातभर टीमें गांवों से हाथियों को दूर रखने में जुटी रहती हैं। इसके लिए मुख्य रूप से मशाल का उपयोग किया जाता है। जब हाथी अधिक आक्रामक हो जाते हैं, तब उन्हें भगाने के लिए स्प्रे मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा विशेष परिस्थितियों में चिली स्प्रे और चिली पाउडर का भी उपयोग किया जाता है।
हाथियों का मुख्य आवागमन मार्ग लुगू पहाड़, दाका साडम, सेहेदा, कुंदा, गंगापुर और महुआटांड़ होते हुए छनछनिया नदी पार कर मां छिन्नमस्तिके मंदिर (रामगढ़) तक जाता है। यह उनका पारंपरिक मार्ग है। इस रास्ते में यदि उन्हें धान, महुआ या अन्य खाद्य पदार्थों की गंध मिलती है, तो वे घरों में घुसकर तोड़फोड़ करते हैं और कई बार लोगों पर हमला भी कर देते हैं।
अधिकारी प्रभार में, स्थायी नियुक्ति का अभाव
बोकारो जिले में डीएफओ का पद फिलहाल प्रभार में चल रहा है। गोमिया, तेनुघाट समेत अन्य रेंजों में भी रेंजर अधिकारी प्रभार में ही कार्य कर रहे हैं, स्थायी नियुक्ति नहीं है। गोमिया और तेनुघाट रेंज में कुजु के रेंजर अधिकारी बटेश्वर पासवान प्रभार संभाल रहे हैं, जबकि रामगढ़ के डीएफओ बोकारो का अतिरिक्त प्रभार देख रहे हैं।
बेरमो में हाथियों के हमले की घटनाएं
- पिछले वर्ष 10 नवंबर की रात जगेश्वर विहार थाना क्षेत्र के तिलैया गांव में 40 वर्षीय चरकू महतो और 38 वर्षीय प्रकाश महतो की हाथियों ने कुचलकर हत्या कर दी।
- 16 नवंबर की रात कुंदा पंचायत के खखंडा गांव में 47 वर्षीय साजो देवी को हाथियों ने मार डाला।
- इस वर्ष 17 जनवरी को रामगढ़ निवासी सब्जी कारोबारी रवींद्र कुमार को सिमराबेड़ा गांव के पास हाथियों ने मार दिया।
- 25 जनवरी को कंडेर पंचायत के दरहाबेड़ा गांव में 35 वर्षीय करमचंद सोरेन की हाथियों के हमले में मौत हो गई।
- 4 फरवरी की देर रात बड़कीपुन्नू गांव में हाथियों ने एक ही परिवार की दो महिलाओं और एक पुरुष को कुचलकर मार डाला।
- गोमिया के गंगापुर गांव में हाथियों ने दादा और पोते को कुचलकर मार दिया।
