जागरण संवाददाता, बोकारो : बोकारो के युवराज सिंह खेल की दुनिया को अलविदा कर फिल्म जगत में भविष्य तलाश रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी ने नौकरी के लिए काफी हाथ-पैर मारा, लेकिन इन्हें सरकारी व गैर सरकारी प्रतिष्ठान में नियोजन नहीं मिला। इसके बाद इन्होंने फिल्मी जगत में कदम रखा और हिन्दी सिनेमा व सीरियल में खलनायक की भूमिका अदा कर रहे हैं।

स्कूल गेम्स में जीता स्वर्ण पदक

युवराज के पिता वंशीडीह तारानगर चास निवासी अटल बिहारी सिंह बोकारो इस्पात संयंत्र के कर्मचारी हैं। स्कूली दिनों से ही इन्हें खेलकूद से लगाव था। इसलिए 2010 में प्रशिक्षक राजेन्द्र प्रसाद की देखरेख में भारोत्तोलन व शक्तित्तोलन का प्रशिक्षण प्राप्त करने लगे। कड़ी मेहनत व लगन से जल्द ही इन्होंने इस खेल में महारथ हासिल कर ली। इन्होंने राज्य स्तर पर कई मेडल जीते। 2012 में दिल्ली में हुए राष्ट्रीय स्कूल गेम्स में स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा अखिल भारतीय इस्पात अंतर इस्पात संयंत्र भारोत्तोलन व शक्तित्तोलन प्रतियोगिता में भी मेडल जीते। युवराज ने कहा कि 2014 तक खेलकूद प्रतियोगिता में भाग लिया। इस दौरान कई मेडल जीते। बेहतर भविष्य के लिए सरकारी व निजी प्रतिष्ठान में नौकरी के लिए प्रयास किया। लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। इसलिए अभिनय के क्षेत्र में भाग्य आजमाने का प्रयास किया। दोस्तों की सलाह पर मुंबई गया। यहां अभिनय का गुर सीखा। इसके पश्चात फिल्म व सीरियल में काम करने का मौका मिला। फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के साथ दिल बेचारा सिनेमा में काम करने का मौका मिला। इसमें खलनायक की भूमिका निभाई। सीरियल चंद्रगुप्त मौर्य एवं जी टीवी के सीरियल तुझसे है राबता में भी खलनायक की भूमिका अदा कर रहा हूं। इस क्षेत्र में ही भविष्य बनाना चाहता हूं।

Posted By: Jagran

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