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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 28, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पोस्टर चिपकाकर शहादत दिवस मनाना किया शुरू

By JagranEdited By:
Published: Tue, 28 Jul 2020 09:59 PM (IST)

बेरमो प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) की ओर से नावाडीह के ऊपरघाट स्थित विभिन्न स्

पोस्टर चिपकाकर शहादत दिवस मनाना किया शुरू
पोस्टर चिपकाकर शहादत दिवस मनाना किया शुरू

बेरमो : प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) की ओर से नावाडीह के ऊपरघाट स्थित विभिन्न स्थानों में पोस्टर चिपकाकर मंगलवार से सप्ताहव्यापी शहादत दिवस मनाने की शुरुआत कर दी गई है। इस दौरान भाकपा माओवादियों के विध्वंसक मंसूबों पर पानी फेरने को पुलिस अलर्ट हो गई है। ऊपरघाट के पेंक, कंजकिरो, पलामू ,पिलपिलो मोड़ आदि में नक्सलियों की ओर से चिपकाए पोस्टरों को पेंक-नारायणपुर थाना के प्रभारी अरुण कुमार शर्मा ने दल-बल के साथ पहुंचकर फाड़कर फेंक दिया।

वहीं इस अवसर पर ऊपरघाट की पोखरिया पंचायत अंतर्गत डेगागढ़ा मैदान में दिवंगत नक्सली घुजा तुरी का शहादत दिवस न मनाया जा सके, पुलिस कैंप किए हुए है।

बता दें कि प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई से 3 अगस्त तक भाकपा माओवादी से जुड़े नक्सली अपने संगठन के संस्थापक चारु मजुमदार एवं कन्हाई चटर्जी के अलावा अन्य दिवंगत साथियों को श्रद्धांजलि देने के लिए शहीदी सप्ताह का आयोजन करते हैं। सूत्रों के अनुसार भाकपा माओवादी के झुमरा-पारसनाथ सब जोनल कमेटी के सचिव रणविजय ने सोमवार की देर शाम ऊपरघाट में सक्रिय माओवादियों के साथ बैठक कर शहादत दिवस के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की है। साथ ही स्थानीय लोगों से अपील की कि शहादत सप्ताह के अवसर पर अपने-अपने गांव में मशाल जुलूस, नुक्कड़ सभा, रैली आदि का आयोजन कर माओवादी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करें।

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चारु मजुमदार का मनाया गया शहादत दिवस

संवाद सहयोगी, कथारा (बेरमो) : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी माले कथारा लोकल कमेटी ने मंगलवार को कथारा में चारु मजुमदार का 48वां शहादत दिवस मनाया। यहां उपस्थित पार्टी के साथियों ने शहीद वेदी पर पुष्प अर्पित किया तथा एक मिनट का मौन रख उन्हें श्रद्धांजलि दी। उपस्थित बोकारो जिला कमेटी सदस्य बालेश्वर गोप ने कहा कि चारु मजूमदार पार्टी के अगुवा साथी थे उनकी शहीद के बाद पार्टी को अपूरणीय क्षति हुई उन्होंने सिद्धांत के खिलाफ कभी भी कोई कार्य नहीं किया। उन्होंने दबे कुचले के अधिकार दिलाने तथा शोषण के खिलाफ हमेशा आवाज को बुलंद रखा। मौके पर बालगोविद मंडल, लीलमोहन महतो, डीके मिस्त्री, अजय रविदास, राजेंद्र राम, राजमोहन राम, महेश सोरेन, छत्रु यादव आदि शामिल थे।