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Bokaro Police Salary Fraud: पुलिस सिस्टम पर सवाल, तत्कालीन डीजीपी के आदेश मानते तो नहीं निकलते 4 करोड़

By Birendra Kumar Pandey Edited By: Mritunjay Pathak
Published: Wed, 08 Apr 2026 11:03 AM (IST)

Bokaro Police Fraud: बोकारो एसपी कार्यालय में एक लेखपाल द्वारा पत्नी के नाम पर चार करोड़ रुपये की अवैध निकासी ने पुलिस व्यवस्था में गहरे भ्रष्टाचार को उजागर किया है।

बोकारो एसपी आफिस के लेखापाल को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस।

बोकारो एसपी आफिस के लेखापाल को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस।

HighLights

  1. एसपी कार्यालय के लेखपाल ने की 4 करोड़ की अवैध निकासी।

  2. बोकारो पुलिस में वर्षों से जमे कर्मियों का खुलासा।

  3. डीजीपी के तबादला आदेशों का नहीं हुआ अनुपालन।

जागरण संवाददाता, बोकारो। बोकारो एसपी कार्यालय के एक लेखपाल द्वारा अपनी पत्नी के नाम पर करीब चार करोड़ रुपये की अवैध निकासी के सनसनीखेज मामले ने बोकारो पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

यह मामला सिर्फ आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि उस जमे हुए तंत्र की परतें खोलता है, जहां वर्षों से एक ही जगह टिके कर्मियों की पकड़ इतनी मजबूत हो चुकी है कि निगरानी और जवाबदेही लगभग समाप्त हो गई है।

लंबे समय तक एक ही पद और स्थान पर बने रहने से न केवल सिस्टम व्यक्तिनिर्भर हो गया है, बल्कि पारदर्शिता भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, जिससे ऐसे फर्जीवाड़े को अंजाम देना आसान हो गया। बोकारो पुलिस व्यवस्था में कई ऐसे उदाहरण हैं, जहां थानों के मुंशी, पुलिस लाइन के बाबू , डीएसपी कार्यालय और एसपी कार्यालय , के साथ गोपनीय शाखा व अन्य स्थानों में कार्यरत कर्मी वर्षों से एक ही जगह जमे हुए हैं।

इनके तबादले को अक्सर यह कहकर टाल दिया जाता है कि वे काम जानने वाले हैं, लेकिन अब यही तर्क व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है। दिलचस्प यह है कि जहां एसपी का औसतन दो वर्ष, डीएसपी का तीन वर्ष और इंस्पेक्टर का दो से पांच वर्ष में तबादला तय है, वहीं निचले स्तर के कई कर्मी दशक भर तक एक ही कुर्सी पर बने रहते हैं।

सूत्रों के अनुसार, मजबूत पैरवी और अंदरूनी पकड़ के कारण इनका स्थानांतरण नहीं हो पाता। स्थिति इतनी असामान्य हो चुकी है कि कुछ कर्मियों को यह भी याद नहीं कि उन्होंने आखिरी बार वर्दी कब पहनी थी। वहीं, कई पुलिसकर्मी वर्षों से नेताओं और अधिकारियों के अंगरक्षक के रूप में जमे हैं।

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इस संदर्भ में तत्कालीन डीजीपी द्वारा जारी आदेश भी बोकारो समेत कई जिलों में बेअसर साबित हुआ है। आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, बोकारो (61), धनबाद (107), गिरिडीह (58), रामगढ़ (43), कोडरमा (82) और चतरा (86) में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थापित हैं। कुल 152 कर्मियों को चिन्हित कर उनके तबादले का निर्देश दिया गया था, लेकिन यह आदेश कागजों तक ही सिमट गया।