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    बोकारो में DMFT फंड में गड़बड़ी पर सांसद-मंत्री आमने-सामने, बैठक में माहौल गरम

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 06:05 PM (IST)

    बोकारो में डीएमएफटी न्यास परिषद की बैठक में सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी और मंत्री योगेन्द्र प्रसाद महतो के बीच डीएमएफटी फंड में गड़बड़ी के आरोपों पर तीखी बहस हुई। सांसद ने पूर्व उपायुक्त पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया, जिसका मंत्री ने विरोध किया। 

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    डीएमएफटी न्यास परिषद की बैठक। (जागरण)

    जागरण संवाददाता, बोकारो। डीएमएफटी न्यास परिषद की बैठक शनिवार को तब विवादों में घिर गई जब गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी और मद्य निषेध मंत्री योगेन्द्र प्रसाद महतो के बीच तीखी नोकझोंक हो गई।

    सांसद ने पूर्व उपायुक्त पर डीएमएफटी फंड में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाया, जिस पर मंत्री महतो ने बिना साक्ष्य के आरोप पर कड़ा विरोध जताते हुए आरोपों को बेबुनियाद बताया।

    उन्होंने कहा कि पहले साक्ष्य लाएं फिर आरोप लगाएं। बैठक में आरोप-प्रत्यारोप के कारण माहौल गरम रहा। कई मुखिया व प्रमुख ने आरोप लगाया कि योजनाओं में उनके नाम का बोर्ड नहीं लगता है। शिलान्यास व उदघाटन सांसद व विधायक ही कर देते हैं। जबकि ग्रामसभा से योजनाओं को उनसे पारित कराया जाता है। पूरी प्रक्रिया में अव्यवस्था है।

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    यदि योजनाओं के चयन एवं ग्राम सभा में पोषक क्षेत्र के मुखिया की भागीदारी है तो योजना के शिलान्यास व उद्घाटन के समय भी उन्हें सम्मान मिलना चाहिए।

    सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने कहा- हुई बड़ी गड़बड़ी

    सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने बैठक में पूर्व डीसी पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि डीएमएफटी फंड के चयन से लेकर क्रियान्वयन तक गड़बड़ियां हुई हैं।

    उन्होंने कहा कि बिना सीसीएल एनओसी के कार्य कराए गए, कई योजनाओं का दो-दो बार भुगतान हुआ और एक लाख रुपये की फोटो कॉपी जैसी खर्चीली अनियमितताओं की रिपोर्ट सामने आई है।

    सांसद ने कहा कि उन्हें कई योजनाओं का ब्योरा तक उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल उठता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि डीएमएफटी जैसी महत्वपूर्ण निधि में किसी प्रकार का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पूरे मामले की हाई-लेवल जांच होनी चाहिए।

    आरोप लगाने से अच्छा साक्ष्य प्रस्तुत करे

    सांसद के आरोपों पर मंत्री योगेन्द्र प्रसाद महतो ने तीखा विरोध जताते हुए कहा कि बिना प्रमाण किसी अधिकारी या पूर्व डीसी पर आरोप लगाना न सिर्फ गैर जिम्मेदाराना है, बल्कि शासन तंत्र को बदनाम करने की कोशिश भी है।

    उन्होंने कहा कि सांसद जिस तरह आरोप लगा रहे हैं, वह सीधे-सीधे व्यक्तिगत आक्षेप की तरह हैं, जबकि उन्हें पहले साक्ष्य जुटाकर प्रक्रिया के तहत जांच का आग्रह करना चाहिए।

    मंत्री ने कहा कि सरकार पारदर्शी कार्यप्रणाली में विश्वास करती है, लेकिन निराधार आरोपों से बैठक का माहौल खराब हुआ और विकास कार्यों की चर्चा प्रभावित हुई।

    उन्होंने कहा कि सूचना आदान-प्रदान की प्रक्रिया को और बेहतर किया जाएगा, परंतु राजनीतिक हंगामे से सही तस्वीर जनता के सामने नहीं आ पाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना तथ्यों के किसी को कटघरे में खड़ा करना स्वीकार्य नहीं है।

    न्यायालय में है मामला जांच के बाद सबकुछ होगा साफ

    विधायक कुमार जयमंगल ने कहा कि जब मामला हाईकोर्ट और एसीबी की जांच के अधीन है, तब बिना प्रमाण किसी पर सीधे आरोप लगाना उचित नहीं है।

    उन्होंने कहा कि जांच के बाद हर चीज स्पष्ट हो जाएगी। यदि गड़बड़ी हुई होगी तो जिम्मेदार निश्चित रूप से बेनकाब होंगे। उन्होंने कहा कि जेएम पोर्टल का इस्तेमाल न होना भी चिंता का विषय है, लेकिन इसे भी जांच में स्पष्ट किया जाएगा। उन्होंने अपील की कि बैठक को हंगामे का मंच बनाने के बजाय प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ना चाहिए।

    मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए

    विधायक जयराम महतो ने कहा कि डीएमएफटी फंड में गड़बड़ी की सूचना चिंताजनक है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी आवश्यक है।

    उन्होंने कहा कि पूर्व में सांसद और विधायकों को योजनाओं की जानकारी न मिलने के कारण ही असंतोष बढ़ा। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता से होना चाहिए, ताकि जनता के धन का सही उपयोग हो सके। यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

    व्यवस्था को पारदर्शी बनाएंगे

    विधायक उमाकांत रजक ने कहा कि डीएमएफटी फंड के उपयोग में केन्द्र और राज्य सरकार की गाइडलाइनों का सख्ती से पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आगे सभी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसी भी तरह के विवाद की गुंजाइश न रहे।

    उन्होंने स्वीकार किया कि बीते दिनों मीडिया में आई खबरों से जिला की छवि प्रभावित हुई है, लेकिन विभिन्न स्तरों पर जांच जारी है और दोषियों पर अवश्य कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक एक साल देर से हुई, जबकि इसे पहले आयोजित होना चाहिए था, जिससे कई विवादों को टाला जा सकता था।