बोकारो: स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की महत्वपूर्ण इकाई बोकारो इस्पात संयंत्र आने वाले दिनों में कंपनी के सबसे बड़ी उत्पादन क्षमता वाला प्लांट के रूप में विकसित होगी। इसका दावा इस्पात मंत्रालय ने लोकसभा स्टेडिग कमेटी को साल 2030 के दिए गए प्रस्ताव में किया है। वर्तमान में इसकी मेजबानी भिलाई इस्पात संयंत्र कर रही है। इसके बाद उत्पादन के मामले में बीएसएल का एक अलग पहचान होगी। हालांकि मंत्रालय के रिपोर्ट में सेल के उत्पादन को बढ़ाने के साथ कोरोना वायरस के चलते होनी वाली कंपनी की माली हालत से भी प्रवर कमेटी को अवगत कराया गया है। इसमें कहा गया है कि नए वित्तीय वर्ष 2020-21 में कंपनी इस स्थिति में नहीं होगी कि किसी नई परियोजना की शुरुआत की जाए। कंपनी के वर्तमान आय-व्यय को देखते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सेल के कर पूर्व का घाटा 2163 करोड़ रुपये होना तय है। इसमें कर पूर्व जमा करने के बाद का घाटा 1415 करोड़ हो सकता है। जबकि इनकम की बात करें तो कंपनी को 61, 545 करोड़ रुपये व ऑपरेटिग कास्ट पर 56287 करोड़ का खर्च है। 30 जून को कंपनी अपना अंतिम वित्तीय परिणाम जारी करेगी। इसके बाद यह आंकड़ा पूरी तरह से साफ हो जाएगा। सेल प्रबंधन 2030 तक का अपना एक्सपांशन प्राजेक्ट तैयार कर ली है। जिसमें बोकारो इस्पात संयंत्र की उत्पाद क्षमता को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इनमें बोकारो इस्पात संयंत्र में इस प्रोजेक्ट पर लगभग 500 करोड़ रूपये की राशि खर्च की जाएगी। जिसमें संयंत्र के विभिन्न विभागों में लंबित पड़े आधुनिकीकरण के कार्य के अलावा नगर क्षेत्र में प्रस्तावित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना है।

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- किस संयंत्र के लिए कितने क्षमता का प्लान -

1. बीएसएल 7.5 एमटी से बढ़ाकर 14.7 एमटी

2. भिलाई 7.5 एमटी से बढ़ाकर 12.2 एमटी

3. राउरकेला 4.5 एमटी से बढ़ाकर 9.3 एमटी

4. दुर्गापुर 2.8 एमटी से बढ़ाकर 8.0 एमटी

5. इस्को बर्नपुर 2.7 एमटी से बढ़ाकर 9.9 एमटी

Posted By: Jagran

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