जागरण संवाददाता, बोकारो: 20 माह से जिला उपभोक्ता फोरम का चक्कर लगाने वाले ग्राहकों को बहुत जल्द राहत मिलने वाली हैं। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष व सदस्य के रिक्त पदों पर जल्द ही अब नियुक्ति होगी। सरकार ने विधानसभा में लंबे समय से रिक्त पदों पर उठे सवाल का जवाब दिया है। कहा है कि बहुत जल्द राज्य भर के खाली पदों पर नियुक्ति हो जाएगी। राज्य व जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष और सचिव की नियुक्ति के लिए उच्च न्यायाधीश के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में चयन समिति बन गई है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 का समाप्त हो चुका है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के 20 जुलाई 2020 से लागू हो जाने के फलस्वरूप इसी अधिनियम के तहत नियुक्ति से संबंधित नियमावली के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बता दें कि दैनिक जागरण ने अपने 19 फरवरी के अंक में 'दिन ढल जाए न्याय न आए' शीर्षक से एक खबर प्रकाशित किया था। इस खबर में बोकारो विधायक सह मुख्य सचेतक विरोधी दल बिरंची नारायण से जागरण ने पूछा तो उनका कहना था कि निश्चित तौर पर यह बड़ा जनहित से जुड़ा मामला है। इसे आगामी बजट सत्र में वह जरूर उठाएंगे। विधायक ने इसे विधानसभा में उठाया तो सरकार की आरे से खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले के मंत्री रामेश्वर उरांव ने जवाब दिया। कहा कि बहुत जल्द इस दिशा में सरकार कार्रवाई करेगी। बता दें कि जिले भर में 548 मामले उपभोक्ता फोरम के समक्ष लंबित हैं। फैसला न मामले के बाद दर्ज होने वाले इजरायवाद के भी 147 मामले लंबित हैं। सरकार के इस जवाब के बाद जिले के 795 उपभोक्ताओं के बीच न्याय की आस जगी है। -एक करोड़ तक के मामले की सुनवाई हो गया है अधिकार- नए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के 20 जुलाई 2020 से लागू हो जाने के बाद अब जिले के उपभोक्ता फोरम को बीस लाख की जगह एक करोड़ रुपये तक के मामलों की सुनवाई का अधिकार मिल गया है। यह जानकारी जिला व्यवहार न्यायालय के वरीय अधिवक्ता आनंद व‌र्द्धन ने देते हुए बताया कि फोरम की जगह अब इसे आयोग के नाम से जाना जाएगा। इसके अलावा उपभोक्ताओं के हित में कई कानून बनाए गए हैं।

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