बोकारो : बोकारो सदर अस्पताल में संचालित एसएनसीयू (सिक न्यू बार्न केयर यूनिट) में इन दिनों बेड की कमी हो गई है, जिसकी वजह से एक बेड पर दो नवजातों का इलाज किया जा रहा है। 12 बेड के इस एसएनसीयू वार्ड में वर्तमान समय में 22 नवजात इलाजरत हैं। बावजूद, एसएनसीयू वार्ड में इलाजरत नवजातों के इलाज में कोई कमी नहीं रखी जा रही है। चिकित्सक के अलावा प्रशिक्षित नर्स की चौबीसों घंटे प्रतिनियुक्ति की गई। यदि नवजातों की संख्या बढ़ी तो अस्पताल प्रबंधन के लिए परेशानी का कारण बन सकता है, जिसे देखते अस्पताल प्रबंधन की ओर से एसएनसीयू में बेड की संख्या बढ़ाने को लेकर राज्य सरकार से पत्राचार किया गया है, जिसमें अस्पताल प्रबंधन की ओर से 12 बेड और बढ़ाने की मांग की गई है। गौरतलब है कि, कुल 12 बेड वाले यूनिट में दो वार्ड बनाए गए हैं। एक वार्ड उन शिशुओं के लिए है, जिनका जन्म सदर अस्पताल में होता है और दूसरा वार्ड उन शिशुओं के लिए है जिनका जन्म जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों या अस्पतालों में हुआ हो और गंभीर अवस्था में यहां भेजे गए हों। स्थिति यह है कि एसएनसीयू के सारे बेड अक्सर सदर अस्पताल में जन्म लेने वाले शिशुओं से ही भरे रहते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि यहां बेडों की संख्या बढ़ाना आवश्यक हो गया है।

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नाजुक हालत के नवजात को मिलता है नया जीवन : जन्म लेने वाले अस्वस्थ बच्चों के लिए सदर अस्पताल का एसएनसीयू वरदान है। एसएनसीयू में 12 रेडिएंट वार्मर, आक्सीजन कंसंट्रेटर, फोटोथेरेपी, पल्स आक्सीमीटर तथा इंफ्यूजन पंप आदि आधुनिक चिकित्सीय उपकरण मौजूद हैं। इन्हीं उपकरणों के सहारे जन्म लेने के बाद मौत से जूझते बच्चों को नया जीवन प्रदान किया जाता है। अभी जो शिशु भरती हैं, उनमें कुछ पीलिया से पीड़ित हैं, तो कुछ लो बर्थ वेट वाले हैं। जबकि आठ से दस शिशुओं को सांस लेने से संबंधित तकलीफ है।

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सदर अस्पताल की चिकित्सकीय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास बढ़ा है। यही वजह है कि 12 बेड वाले एएसएनसीयू वार्ड में 22 शिशु इलाजरत हैं। इनके इलाज को लेकर अस्पताल प्रबंधन पूरी तरह से गंभीर है। शिशुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार को बेड की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है।

डा. एनपी सिंह, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल, बोकारो।

Edited By: Jagran