कौन हैं ऋषि कुमार कौशल? रियासी के हक के लिए 18 साल तक न बाल काटे- ना दाढ़ी, ऐसे बने ‘टाइगर ऑफ त्रिकूटा हिल्स
Baba Jitto of Reasi: रियासी जिले की बहाली के संघर्ष में ऋषि कुमार कौशल का योगदान अविस्मरणीय है, उन्हें 'दूसरा बाबा जित्तो' और 'टाइगर ऑफ त्रिकूटा हिल्स' कहा जाता था।

ऋषि कुमार कौशल। (फाइल फोटो)
HighLights
ऋषि कुमार कौशल रियासी बहाली के संघर्ष में अग्रणी रहे।
उन्होंने जिले का दर्जा मिलने तक बाल-दाढ़ी न कटवाने की प्रतिज्ञा ली।
18 साल बाद रियासी को जिला घोषित होने पर प्रतिज्ञा पूरी की।
राजेश डोगरा, उधमपुर। रियासी जिले की बहाली के संघर्ष में ऋषि कुमार कौशल का योगदान हमेशा याद किया जाता रहेगा। अपने क्षेत्र के हक के लिए उनके संघर्ष, दृढ़ इच्छाशक्ति और निडर स्वभाव ने उन्हें लोगों के बीच अलग पहचान दिलाई।
यही वजह थी कि उनके व्यक्तित्व को सम्मान देते हुए लोग उन्हें रियासी का दूसरा बाबा जित्तो कहने लगे थे। उनके साहस और जुझारूपन के कारण उन्हें टाइगर ऑफ त्रिकूटा हिल्स के नाम से भी जाना जाता था।
प्रतिज्ञा ने दिलाई अलग पहचान
जिला बहाली के आंदोलन के दौरान ऋषि कुमार कौशल ने एक अनूठा संकल्प लिया। उन्होंने तय किया कि जब तक रियासी को दोबारा जिले का दर्जा नहीं मिलता, तब तक वह अपने बाल और दाढ़ी नहीं कटवाएंगे। उनका कहना था कि बाबा जित्तो ने जिस तरह अपने अधिकार और सम्मान के लिए अन्याय के सामने झुकने से इनकार किया था, उसी तरह वह भी अपने क्षेत्र के हक के लिए संघर्ष करेंगे। इसी प्रतिज्ञा ने उन्हें आंदोलन के दौरान एक अलग पहचान दी।
घोषणा के बाद भी जारी रखा संकल्प
रियासी जिला बहाली के लिए जिला बहाल एक्शन कमेटी का गठन किया गया था। आंदोलन के दौरान तत्कालीन फारूक अब्दुल्ला सरकार की ओर से जिले का दर्जा बहाल करने की घोषणा की गई, लेकिन घोषणा के बावजूद इसे तत्काल लागू नहीं किया गया। छह जुलाई 2006 को रियासी को जिला का दर्जा वापस देने का एलान हुआ।
इसके बावजूद ऋषि कुमार कौशल ने अपनी प्रतिज्ञा समाप्त नहीं की। उनका स्पष्ट कहना था कि केवल घोषणा पर्याप्त नहीं है, जब तक जिला बहाली का फैसला जमीन पर लागू नहीं होता, उनका संकल्प जारी रहेगा।
18 वर्ष बाद पूरी हुई प्रतिज्ञा
28 अप्रैल 2007 को उपायुक्त कार्यालय और जिला पुलिस मुख्यालय का उद्घाटन हुआ। इसके बाद स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित भव्य कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद और तत्कालीन विधायक जुगल किशोर शर्मा की मौजूदगी में ऋषि कुमार कौशल ने अपनी वर्षों पुरानी प्रतिज्ञा पूरी की। यहां उन्होंने करीब 18 वर्ष बाद अपने बाल और दाढ़ी कटवाई, लेकिन मूंछ को संघर्ष की निशानी बनाए रखा।
उन्होंने कहा था कि जिला बहाली का संकल्प पूरा होने पर बाल और दाढ़ी तो कटवा लिए हैं, लेकिन आंदोलन की याद को जीवित रखने के लिए वह अपनी मूंछ नहीं कटवाएंगे। इस तरह उनकी मूंछ भी लंबे समय तक उनके संघर्ष और रियासी के लिए किए गए आंदोलन की पहचान बनी रही।
ऋषि कुमार कौशल की 100वीं जयंती
रियासी जिला बहाली के संघर्ष में अहम भूमिका निभाने वाले ऋषि कुमार कौशल की 100वीं जयंती पर शनिवार को उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। इस अवसर पर सुबह ऋषि चौक में कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां स्थापित ऋषि कुमार कौशल की प्रतिमा पर पुष्पमालाएं अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।
