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अब बर्गर-पिज्जा में घुलेगा जम्मू-कश्मीर के 'देसी चीज' का स्वाद, 27 दिन तक फ्रेश रहेगी कलाड़ी; मोजरेला को टक्कर देगी

Published: Fri, 16 Oct 2026 07:00 AM (IST)

Kalari Cheese: वैज्ञानिकों ने उधमपुर की प्रसिद्ध कलाड़ी पनीर की शेल्फ लाइफ 2-3 दिन से बढ़ाकर 26-28 दिन कर दी ...और पढ़ें

लोकल से ग्लोबल होने की राह पर डुग्गर की खाद्य विरासत। (फाइल फोटो)

लोकल से ग्लोबल होने की राह पर डुग्गर की खाद्य विरासत। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. कलाड़ी की शेल्फ लाइफ वैज्ञानिक तकनीक से 28 दिन बढ़ी।

  2. वैश्विक फूड चेन में बर्गर, पिज्जा में कलाड़ी का स्वाद।

  3. स्थानीय कलाड़ी निर्माताओं, किसानों के लिए नए अवसर खुलेंगे।

अमित माही, उधमपुर। कल्पना कीजिए, किसी बड़े शहर में बर्गर या पिज्जा मंगाने पर उसमें उधमपुर की प्रसिद्ध कलाड़ी का स्वाद भी मिलने लगे। सुनने में भले ही यह कल्पना लगे, लेकिन डुग्गर की इस पारंपरिक खाद्य विरासत को अंतरराष्ट्रीय फूड चेन तक पहुंचाने की दिशा में वैज्ञानिक प्रयास काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। जिस कलाड़ी का असली स्वाद महज दो-तीन दिन में बदलने लगता था, उसे वैज्ञानिक तकनीक से करीब चार सप्ताह से अधिक समय तक सुरक्षित रखने में सफलता मिल गई है। वह भी इसके मूल स्वाद, सुगंध और पौष्टिक गुणों से समझौता किए बिना।

इस उपलब्धि ने उधमपुर की कलाड़ी को स्थानीय बाजारों से निकालकर वैश्विक खाद्य कारोबार का हिस्सा बनाने की नई संभावनाएं पैदा की हैं। उधमपुर, विशेषकर रामनगर क्षेत्र की पहचान बन चुकी कलाड़ी को अक्टूबर 2023 में भौगोलिक संकेतक (जीआइ) टैग मिला था।

वर्ष 2023 में श्रीनगर में आयोजित जी-20 पर्यटन बैठक के दौरान विदेशी मेहमानों के मेन्यू के लिए भी इसका चयन हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इसकी विशेष पहचान का उल्लेख कर चुके हैं। इसके बावजूद सीमित शेल्फ लाइफ बड़े बाजारों तक नियमित आपूर्ति में बाधा बनी रही।

कलाड़ी की शेल्फ लाइफ 26 दिन तक बढ़ाई गई 

इस चुनौती को दूर करने के लिए मैसूरु स्थित वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआइआर) के केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआइ) के वैज्ञानिकों ने कलाड़ी के संरक्षण और प्रसंस्करण पर काम किया।

विकसित तकनीक से निर्धारित प्रशीतित परिस्थितियों में इसकी शेल्फ लाइफ 26 दिन तक बढ़ाई गई है। इससे स्वाद और गुणवत्ता बनाए रखते हुए लंबी दूरी तक भंडारण एवं परिवहन की संभावना मजबूत हुई है।

कलाड़ी से बनेंगे बर्गर, कटलेट और सैंडविच

अब संस्थान ने मानकीकृत कलाड़ी तकनीक के व्यावसायीकरण के लिए निजी कंपनियों से रुचि प्रस्ताव (ईओआइ) आमंत्रित किए हैं। इसका उद्देश्य तकनीक हस्तांतरण के माध्यम से कलाड़ी के आधुनिक खाद्य उत्पाद विकसित करना है। कलाड़ी बर्गर, कटलेट, हॉटडॉग और सैंडविच तैयार कर इन्हें मिलेट आधारित उत्पादों की तरह राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फूड चेन तक पहुंचाने की योजना है।

अगर योजना परवान चढ़ती है तो बड़े बड़े ब्रैंड के बर्गरों और पिज्जा में मोजरेला चीज के साथ कलाड़ी चीज भी एक विकल्प के बन सकता है। हालांकि मोजरेला चीज की तरह इसके पिघलने, फैलने और गर्म होने पर बनावट जैसे गुणों का व्यावसायिक परीक्षण जरूरी होगा।

यदि यह पहल सफल होती है तो स्थानीय कलाड़ी निर्माताओं, दूध उत्पादक किसानों और छोटे कारोबारियों को नए बाजार मिल सकते हैं। प्रसंस्करण, पैकेजिंग, कोल्ड चेन और विपणन से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। हालांकि तकनीक हस्तांतरण, मानकीकृत उत्पादन और खाद्य सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद ही बड़े पैमाने पर व्यावसायिक आपूर्ति संभव होगी।

कलाड़ी बनेगी रोजगार और आजीविका का नया माध्यम

उधमपुर की कलाड़ी अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचने की दहलीज पर है। पिछले छह माह में सीएफटीआरआइ के वैज्ञानिकों के सहयोग से इसके स्वाद, सुगंध और पौष्टिक गुण बरकरार रखते हुए शेल्फ लाइफ दो-तीन दिन से बढ़ाकर करीब चार सप्ताह से गई है।

अब संस्थान ने तकनीक हस्तांतरण के लिए निजी कंपनियों से प्रस्ताव मांगे हैं, ताकि कलाड़ी बर्गर, कटलेट, हॉटडॉग और सैंडविच जैसे उत्पाद विकसित कर अंतरराष्ट्रीय फूड चेन तक पहुंचाए जा सकें।

उन्होंने कहा कि इससे रोजगार और आजीविका के नए अवसर खुलेंगे। प्रधानमंत्री के ‘विकास भी, विरासत भी’ के संकल्प के अनुरूप कलाड़ी ऊधमपुर और जम्मू-कश्मीर की ओर से दुनिया के लिए अनूठा तोहफा बन सकती है।

प्रधानमंत्री ने भी दो बार किया कलाड़ी का उल्लेख

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2024 को उधमपुर में आयोजित चुनावी जनसभा में अगली बार आने पर स्वादिष्ट कलाड़ी का आनंद लेने की इच्छा जताई थी। इसके बाद उन्होंने अप्रैल 2026 को मन की बात कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर की कलाड़ी का उल्लेख करते हुए उन्होंने पारंपरिक खाद्य उत्पादों को आधुनिक तकनीक, निवेश और बेहतर पैकेजिंग के जरिए वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की संभावनाओं पर बात की थी।

क्या है कलाड़ी?

कलाड़ी जम्मू-कश्मीर का पारंपरिक दुग्ध उत्पाद है। दूध से विशेष विधि द्वारा तैयार इसकी गोल, चपटी टिकिया को तवे पर सेंककर खाया जाता है। पकने पर बाहरी सतह सुनहरी और कुरकुरी, जबकि अंदर का हिस्सा मुलायम रहता है। अपने विशिष्ट स्वाद और बनावट के कारण यह सामान्य पनीर से अलग है। ऊधमपुर का कलाड़ी-कुलचा विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

कारोबार को मिलेगी नई उड़ान

उधमपुर मुख्य पशुपालन अधिकारी डॉ. श्वेतांबरी खजूरिया ने बताया कि कलाड़ी की शेल्फ लाइफ बढ़कर 26 दिन होने से इसके कारोबार के विस्तार की नई संभावनाएं पैदा हुई हैं। अब इसके पारंपरिक स्वाद और गुणवत्ता को लंबे समय तक बरकरार रखते हुए देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों तक भी पहुंचाया जा सकेगा।

पहले अतिरिक्त दूध से कलाड़ी बनाकर मुख्य रूप से घरेलू उपयोग और स्थानीय बाजारों में बेची जाती थी। अब इसकी शेल्फ लाइफ बढ़ने से बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन का रास्ता खुलेगा। इससे दूध उत्पादकों को बेहतर बाजार मिलने के साथ अधिक लोग कलाड़ी उत्पादन को स्वरोजगार के रूप में अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकेंगे।