विकास अबरोल, ऊधमपुर : इस बार हमेशा जोश और जुनून से लबरेज रहने वाली युवा पीढ़ी के साथ-साथ बुजुर्गों में भी कमाल का जज्बा देखने को मिला। ऊधमपुर-डोडा लोकसभा सीट पर वीरवार सुबह जहां युवाओं में मतदान को लेकर काफी उत्साह दिखा, वही बुजुर्ग भी उनसे किसी भी मामले में पीछे नहीं थे। बुजुर्ग मतदाता किसी मतदान केंद्र में अपने परिजनों के साथ तो किसी मतदान केंद्र पर अपनी उम्र के साथियों के साथ्ज्ञ धीरे-धीरे पहुंचकर राष्ट्र के इस महापर्व में अपनी आहुतियां समर्पित की। जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित टिकरी हायर सेकेंडरी स्कूल में बने मतदान केंद्र 28 के बाहर तो सुबह सात बजे ही पुरुष और महिला मतदाताओं की लंबी-लंबी कतारें लगना शुरू हो गई थी। यहीं नजारा टिकरी के पंचायत घर में बने मतदान केंद्र 29 पर भी देखने को मिला। महिलाओं से लेकर बुजुर्गों में मताधिकार का प्रयोग करने के लिए काफी जोश दिखा। हेडमास्टर के पद से सेवानिवृत्त हो चुके टिकरी के तारा चंद खुद कस्बे स्थित दुकानों में जाकर सभी से मतदान करने की अपील करते दिखे। अभी टिकरी से दो किलोमीटर आगे बढ़े ही थे कि अचानक नजर राष्ट्रीय राजमार्ग के बाईं ओर स्थित गवर्नमेंट ग‌र्ल्स मिडिल स्कूल मांड पर पड़ी। इस स्कूल में बने 33 नंबर मतदान केंद्र पर काफी तादाद में मतदाता अपने वोट डालने को लेकर उत्सुक दिखे। इनमें से अधिकतर संख्या बुजुर्गों की थी। इन मतदान केंद्रों में सबसे रोचक बात यह रही कि बुजुर्गों से लेकर युवा मतदाताओं में किसी पार्टी को कितने वोट पड़ रहे हैं और किसी तरफ अधिक रुझान है, इसको लेकर काफी उत्सुकता दिखी। मतदान केंद्रों के बाहर सभी वोट डालने के बाद अब 23 मई को आने वाले नतीजों को लेकर बहस करते भी दिखे। मतदान केंद्रों में तैनात सीआरपीएफ कर्मी और पुलिस के जवान बुजुर्गों का हाथ थामकर उन्हें भीतर ले जाते दिखे। गढ़ी स्थित संकरी और चढ़ाई वाली गली में स्थित गवर्नमेंट ग‌र्ल्स हाई स्कूल में बने मतदान केंद्रों में वोट डालने वाले बुजुर्गों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ा, लेकिन बावजूद इसके उनके हौसलों में किसी तरह की कमी नहीं दिखी। उधमपुर जिले के कई इलाके ऐसे भी हैं, जहां के गांवों में सड़कें नहीं हैं। ऐसे में कई बुजुर्ग लोगों को मतदान केंद्रों तक पहुंचने के लिए पैदल ही आना पड़ा। इस मतदान केंद्र से तीन किलोमीटर दूर स्थित कांती गांव की रहने वाली 80 वर्षीय दो सहेलियां विशनो देवी और अशरी देवी ने दोनों लाठियों के सहारे मतदान केंद्र पहुंच कर मतदान किया। उसके बाद उनके चेहरे पर मतदान करने की खुशी साफ झलक रही थी। गांव में सड़क नहीं बनने और पानी की नियमित आपूर्ति नहीं होने पर सरकार के खिलाफ सख्त नाराजगी थी, लेकिन आंखों में उम्मीद कि किरण भी नजर आ रही थी कि वोट देने के बाद जो इस बार आएगा उनकी समस्या का निपटारा कर ही देगा। मतदान केंद्र पहुंचे इन 85 वर्षीय बुजुर्ग मतदाता विश्वामित्र का कहना था कि उन्हें याद नहीं उन्होंने कभी वोट न डाला हो। यह कर्तव्य नहीं सभी का धर्म है और इसे हर हाल में पूरा करना चाहिए। जब तक वे ¨जदा है, इस धर्म का पालन करते रहेंगे।

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