ऊधमपुर में बेकाबू हुआ आवारा कुत्तों का खौफ: हर दिन 20 शिकार, 2 साल में करीब 9 हजार लोग पहुंचे अस्पताल
ऊधमपुर जिले में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है, जहां रोजाना औसतन 20 मामले सामने आ रहे हैं और ...और पढ़ें
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दो वर्षों में 8,179 लोगों को कुत्तों ने काटा।
HighLights
ऊधमपुर में रोजाना औसतन 20 कुत्ते के काटने के मामले
2024-25 में 8,179 मामले, 2026 में 4,000 से अधिक
आवारा कुत्तों पर नियंत्रण और नसबंदी अभियान धीमी गति से
शेर सिंह, ऊधमपुर। ऊधमपुर जिले में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके काटने के मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक आवारा कुत्तों के झुंड लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।
जिले में कुत्तों के काटने के रोजाना औसतन करीब 20 मामले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों में उपचार की व्यवस्था की गई है और मरीजों को एंटी रैबीज वैक्सीन निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन दूसरी ओर आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
जिले में वर्ष 2024 और 2025 के दौरान कुत्तों के काटने के कुल 8,179 मामले सामने आए थे। वहीं वर्ष 2026 में अभी तक चार हजार से अधिक लोग कुत्तों के काटने के बाद उपचार के लिए अस्पतालों तक पहुंच चुके हैं।
अकेले जीएमसी ऊधमपुर में हर महीने औसतन करीब 400 मामले सामने आने की बात सामने आई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में कुत्तों के काटने की समस्या कितनी व्यापक हो चुकी है।
शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग आवारा कुत्तों के झुंड से परेशान हैं। सुबह और शाम के समय सड़क पर निकलने वाले लोगों, बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई स्थानों पर कुत्तों के झुंड अचानक राहगीरों के पीछे दौड़ पड़ते हैं, जिससे हादसे का खतरा भी बना रहता है।
अस्पतालों में वैक्सीन उपलब्ध, समय पर उपचार की व्यवस्था
कुत्ते के काटने के मामलों को देखते हुए जीएमसी ऊधमपुर सहित जिले के उप जिला अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन और आवश्यकतानुसार सिरम उपलब्ध रखने की व्यवस्था की गई है।
अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों को निर्धारित उपचार के तहत निशुल्क एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई जाती है। जानकारी के अनुसार कुत्ते के काटने के बाद मरीज को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटी रैबीज वैक्सीन की कुल चार खुराक लगाई जाती हैं।
उप जिला अस्पतालों में किसी समय वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में मरीजों को जीएमसी ऊधमपुर रेफर किया जाता है या निजी स्तर पर वैक्सीन खरीदनी पड़ सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य संस्थानों में वैक्सीन की निरंतर उपलब्धता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
आवारा कुत्तों पर नियंत्रण की योजना जमीन पर नहीं पकड़ पाई रफ्तार
एक तरफ अस्पतालों में कुत्ते के काटने के बाद उपचार की व्यवस्था है, तो दूसरी तरफ आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए नगर परिषद और नगर पालिकाओं की कार्रवाई अभी अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाई है।
जिले में आवारा कुत्तों की वास्तविक संख्या का सर्वेक्षण भी अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। इसके अलावा डॉग शेल्टर होम की योजना भी अभी धरातल पर नहीं उतर पाई है। हालांकि प्रशासन की ओर से डॉग शेल्टर होम के लिए जगानू में जमीन का चयन किया जा चुका है और इस दिशा में प्रयास जारी हैं।
प्रशासन का उद्देश्य आवारा कुत्तों के लिए उचित व्यवस्था तैयार करने के साथ समस्या के समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है।
नसबंदी अभियान भी अभी शुरू नहीं हो पाया
ऊधमपुर शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाने के लिए नसबंदी अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करना भी जरूरी माना जा रहा है। लेकिन नगर परिषद ऊधमपुर की ओर से अभी तक इस दिशा में जमीनी स्तर पर अपेक्षित काम शुरू नहीं हो पाया है।
ऐसे में कुत्तों की बढ़ती संख्या के साथ उनके काटने के मामले भी लोगों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। लोगों का कहना है कि केवल कुत्ते के काटने के बाद अस्पतालों में उपचार उपलब्ध करवाना समस्या का एक हिस्सा है।
इसके साथ ही आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने, उनकी नसबंदी करने, डॉग शेल्टर की व्यवस्था करने और रिहायशी क्षेत्रों में कुत्तों के झुंड पर नियंत्रण के लिए दीर्घकालिक योजना लागू करने की जरूरत है।
क्या है विश्व रैबीज दिवस का संदेश
विश्व रैबीज दिवस के अवसर पर लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि कुत्ते के काटने की स्थिति में घाव को तत्काल साफ कर चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए और डाक्टर की सलाह के अनुसार एंटी रैबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स करवाना चाहिए।
लापरवाही की स्थिति में रैबीज जानलेवा साबित हो सकता है। ऊधमपुर में बढ़ते मामलों के बीच जागरूकता के साथ-साथ आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की जरूरत भी पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
जीएमसी ऊधमपुर में वैक्सीन की पूरी व्यवस्था रहती है और समय पर लोगों को उपचार मिल रहा है। लगातार बढ़ रहे मामले चिंता का विषय है।
सद्दाम हुसैन, नगर परिषद सीईओ ऊधमपुर ने कहा कि हाउसिंग एंड अर्बन डिपार्टमेंट की तरफ से डिविजन स्तर कुत्तों की गिनती, नसबंदी, पकड़ने को लेकर कर्मचारियों की टीम तैयार की जा रही है। जब यह टीम नगर परिषद व नगर पालिकाओं को मिलेगी तो उसके बाद ही आगे का काम शुरू किया जा सकेगा। हम कर्मचारियों के मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
