जम्मू-कश्मीर: शगुन परिहार पर क्यों है आलाकमान को भरोसा? 29 की उम्र में NC के दिग्गज को हराया, अब BJP में बड़ा पद
शगुन परिहार को भाजयुमो का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जो 2024 में किश्तवाड़ से विधायक बनी थीं। आतंकवादी ...और पढ़ें

शगुन परिहार बनीं भाजयुमो राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किश्तवाड़ से विधायक। (फाइल फोटो)
HighLights
शगुन परिहार भाजयुमो की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त।
2024 में किश्तवाड़ से विधानसभा चुनाव जीतकर बनीं विधायक।
राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं को जोड़ने की बड़ी चुनौती।
बलबीर सिंह जम्वाल, किश्तवाड़। किश्तवाड़ विधायक शगुन परिहार का राजनीतिक सफर निजी त्रासदी, तकनीकी शिक्षा और सक्रिय जनजीवन के बीच आगे बढ़ा है। वर्ष 2018 में आतंकियों के हाथों पिता अजीत परिहार और चाचा अनिल परिहार को खोने के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी नहीं बनाई। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में किश्तवाड़ से जीत दर्ज कर उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। अब भारतीय जनता युवा मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में उनके सामने युवाओं को संगठन से जोड़ने और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका को प्रभावी बनाने की चुनौती होगी।
नई जिम्मेदारी मिलने पर शगुन परिहार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष, भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हेमांग जोशी, भाजपा जम्मू-कश्मीर के प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा सहित पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व का आभार जताया।
उन्होंने कहा कि नेतृत्व ने उन पर जो विश्वास जताया है, वह उनके लिए गौरव और सम्मान का विषय है। वह पूरी निष्ठा और समर्पण से संगठन की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने, युवाओं को संगठन से जोड़ने और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए कार्य करती रहेंगी। उन्होंने देशभर के कार्यकर्ताओं और युवा साथियों के सहयोग को अपनी ताकत बताया।
छात्र जीवन में एबीवीपी से जुड़ीं, फिर राजनीति में रखा कदम
शगुन परिहार की राजनीतिक पहचान केवल चुनावी जीत तक सीमित नहीं रही है। छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों में भाग लिया। तकनीकी शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम बढ़ाया और किश्तवाड़ के स्थानीय मुद्दों को उठाया।
वर्ष 2024 में 29 वर्ष की उम्र में विधानसभा चुनाव जीतकर उन्होंने क्षेत्र की राजनीति में अपनी जगह बनाई। उन्होंने नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता सज्जाद अहमद किचलू को हराया था।
पिता और चाचा की हत्या
उनके जीवन का सबसे कठिन दौर नवंबर 2018 में आया, जब आतंकियों ने उनके पिता अजीत परिहार और चाचा अनिल परिहार की हत्या कर दी थी। इस घटना ने परिवार को गहरा आघात पहुंचाया, लेकिन शगुन ने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहना जारी रखा। उनकी राजनीतिक यात्रा में यह घटना एक अहम पृष्ठभूमि के रूप में जुड़ी रही है।
राजनीति के साथ उनकी शैक्षणिक यात्रा भी जारी रही। उन्होंने हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की डिग्री और आईके गुजराल पंजाब तकनीकी विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम में एमटेक किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह पीएचडी भी कर रही हैं।
किश्तवाड़ के लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना भी चुनौती
राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में उनकी भूमिका बढ़ने के साथ अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह जम्मू-कश्मीर सहित देशभर के युवाओं के मुद्दों को किस तरह उठाती हैं। किश्तवाड़ के विकास और अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाते हुए राष्ट्रीय संगठन में प्रभावी योगदान देना उनके सामने प्रमुख चुनौती होगी।
