जागरण संवाददाता, ऊधमपुर : नगर परिषद ऊधमपुर पर कार्रवाई करते हुए 1.39 करोड़ रुपये के जुर्माने के फैसले को ऊधमपुर वार्ड नंबर एक की पार्षद प्रीति खजूरिया ने सही ठहराया है। उन्होंने इस जुर्माने के लिए ऊधमपुर के नगर परिषद और उसके अध्यक्ष की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही पूर्व विधायकों को भी इस समस्या के प्रति गंभीरता न दिखाने के लिए आड़े हाथों लिया।

मंगलवार को ऊधमपुर में पत्रकार वार्ता में अपनी बात रखते हुए प्रीति खजूरिया ने कहा कि एनजीटी की कार्रवाई से साफ हो गया है कि सारा शहर बेहद दूषित पानी पी रहा है और प्रयोग कर रहा है। क्योंकि जिस फिल्ट्रेशन प्लांट से शहर को पानी आपूर्ति की जाती है, वहां से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर नगर परिषद ने कचरा डंपिग यार्ड बना रखा है। इस कचरे से तवी प्रदूषित होती है, और वही दूषित पानी लोगों को सप्लाई किया जाता है। दूषित पानी की वजह से आज लगभग हर घर में टाइफाइड, हैजा व पीलिया जैसे दूषित पानी से होने वाले रोगों के मरीज हैं। एनजीटी की कार्रवाई से अब शायद नगर परिषद और नप अध्यक्ष जांगेंगे। नगर परिषद अध्यक्ष खुद भी एक डाक्टर हैं और अच्छी तरह समझते हैं कि दूषित पानी पीने से क्या रोग हो सकते हैं।

प्रीति ने कहा कि नप गठन के बाद पहली ही बैठक में उन्होंने जखैनी से कचरा डंपिग यार्ड को स्थानातंरित करने की मांग का प्रस्ताव पेश किया। जिसे सभी 21 पार्षदों ने मंजूरी भी दी। मगर आज तक इस मंजूर प्रस्ताव को आगे भेज कर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यहां तक कि बार-बार पूछने पर भी आज तक कोई जबाव नहीं दिया गया। आज तक शहर के इस अहम मुद्दे को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई गई।

उन्होंने पूर्व विधायकों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि एक पूर्व विधायक जिन्होंने 12 साल तक ऊधमपुर का प्रतिनिधित्व किया, इस समस्या को हल कराने में तो वह नाकाम रहे, मगर नगर परिषद पर 1.39 करोड़ के जुर्माने को उचित करार देने के साथ इस मुद्दे को कितनी बार कहां पर उठाया यह बता रहे हैं।

Posted By: Jagran

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