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क्या आपने देखी डोगरी फिल्म ‘आऊं आं शिंदा’? इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में मिला सम्मान, जम्मू का गौरव बढ़ा

Published: Wed, 09 Sep 2026 06:55 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में डोगरी फिल्म 'आऊं आं शिंदा' को सम्मानित किया गया। अभिनेता धारुण केसर और निर्माता ...और पढ़ें

फिल्म फेस्टिवल में सम्मान प्राप्त करने के बाद अभिनेता धरुन केसर। फोटो- धरुन केसर

फिल्म फेस्टिवल में सम्मान प्राप्त करने के बाद अभिनेता धरुन केसर। फोटो- धरुन केसर

HighLights

  1. डोगरी फिल्म 'आऊं आं शिंदा' को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सम्मान मिला।

  2. अभिनेता धारुण केसर और निर्माता सुमन केसर हुए सम्मानित।

  3. फिल्म ने जम्मू-कश्मीर की स्थानीय भाषा-संस्कृति को बढ़ावा दिया।

जागरण संवाददाता, कटड़ा। जम्मू-कश्मीर की स्थानीय भाषा और संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाने के प्रयासों को उस समय प्रोत्साहन मिला, जब जम्मू के वेव सिनेमा हॉल, वेव मॉल में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर में डोगरी फिल्म ‘आऊं आं शिंदा’ को सम्मानित किया गया। फिल्म के अभिनेता धरुन केसर (डीके) और निर्माता सुमन केसर को समारोह में पुरस्कार प्रदान किया गया।

समारोह में डिविजनल कमिश्नर जम्मू रमेश कुमार, डीआईजी जम्मू श्रीधर पाटिल, ज्वाइंट डायरेक्टर डीआईपीआर जम्मू दीपक दुबे सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

अतिथियों ने जम्मू-कश्मीर की फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कलाकारों, निर्माताओं और तकनीकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय भाषाओं में बनने वाली फिल्मों के माध्यम से क्षेत्र की कला, संस्कृति और परंपराओं को व्यापक मंच मिल रहा है।

‘आऊं आं शिंदा’ 2022 में रिलीज हुई थी

‘आऊं आं शिंदा’ नवंबर 2022 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। यह डोगरी फिल्म जम्मू की स्थानीय फिल्म इंडस्ट्री के सफर में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली फिल्मों में शामिल है।

आयोजकों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में अब तक करीब 11 फिल्में बनाई जा चुकी हैं, जिनमें से नौ फिल्मों को विभिन्न स्तरों पर सम्मान मिल चुका है। इसे स्थानीय फिल्म जगत के लिए उत्साहजनक उपलब्धि माना जा रहा है।

यह पुरस्कार पूरी डोगरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए गर्व 

कटड़ा निवासी अभिनेता धरुन केसर ने सम्मान मिलने पर खुशी जताते हुए कहा कि यह पुरस्कार उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरी डोगरी फिल्म इंडस्ट्री और जम्मू-कश्मीर के कलाकारों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि स्थानीय कलाकारों को यदि उचित मंच और दर्शकों का सहयोग मिलता रहे तो जम्मू-कश्मीर में फिल्म निर्माण की नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

धरुन केसर ने कहा, 'डोगरी भाषा और जम्मू-कश्मीर की संस्कृति में बहुत समृद्धता है। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि अपनी कहानियों और कलाकारों को बड़े मंच तक पहुंचाया जाए। ‘आऊं आं शिंदा’ को मिला यह सम्मान हम सभी के लिए प्रेरणा है। इससे स्थानीय कलाकारों का हौसला बढ़ेगा और आने वाले समय में और बेहतर फिल्में बनाने की ऊर्जा मिलेगी।'

स्थानीय फिल्मों को आगे भी सहयोग मिलने की जताई उम्मीद

उन्होंने फिल्म से जुड़े कलाकारों, निर्माता, निर्देशक और पूरी टीम के साथ-साथ फिल्म महोत्सव के आयोजकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि जम्मू-कश्मीर में स्थानीय भाषा की फिल्मों को आगे भी दर्शकों और संस्थाओं का सहयोग मिलता रहेगा।