पौनी, संवाद सहयोगी।कहते हैं अगर इरादे पक्के और हौसले बुलंद हों तो कोई भी काम कठिन नहीं होता। इस बात को साकार किया है राकेश पहलवान ने, जिन्होंने दिव्यांग होने के बावजूद सैकड़ों कुश्तियां लड़ीं।

उन्होंने कस्बे में आयोजित दंगल में अपने से बड़े ऊधमपुर के पहलवान अरुण को हराकर दंगल देख रहे दर्शकों का दिल जीत लिया। पहलवान राकेश कुमार (43) पुत्र स्वर्ण लाल कठुआ जिले के हीरानगर के निवासी हैं। उन्होंने बातचीत में बताया कि इसके बाद वह पौनी में आयोजित होने वाले तीन और दंगलों में अपना दमखम दिखाएंगे। राकेश ने बताया कि वह सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल हीरानगर से बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई किए हैं।

उन्हें तीन साल की उम्र में पोलियो ने अपनी चपेट में ले लिया था। इलाज करवाने के बावजूद उसकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ, लेकिन परिवार का पूरा सहयोग मिलने के बाद उन्होंने अपनी बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद हरेक सरकारी विभाग में नौकरी के लिए आवेदन दिया, लेकिन 50 प्रतिशत अंक होने के बावजूद उनका सरकारी नौकरी पाने का सपना पूरा नहीं हुआ।

उनके दोस्त ने उन्हें नौकरी न मिलने पर पहलवानी के गुर सिखाए। 20 वर्ष की आयु में दोस्त की सड़क हादसे में मौत होने के बाद उन्हें काफी सदमा लगा, जिसके बाद पिछले करीब 23 वर्ष से अपने दोस्त की याद में कुश्तियां लड़ता आ रहा हूं। पौनी में हुए दंगल में पौनी दंगल कमेटी के प्रधान व पूर्व सरपंच अजीत कुमार केसर ने मुकाबला जीतने पर उन्हें नकद राशि देकर सम्मानित किया। इसके अलावा जम्मू के दयारन गांव के रहने वाले दिव्यांग पहलवान तरसेम ¨सह ने भी कुश्ती में बेहतर प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को काफी मनोरंजित किया। उन्हें भी दंगल कमेटियों की तरफ से सम्मानित किया गया।

बराबरी पर छूटी बड़ी माली की कुश्ती पौनी में बैसाखी पर आयेाजित दंगल में बड़ी माली की कुश्ती बराबरी पर छूटी। जम्मू के पहलवान रहमत अली व अमृतसर के पहलवान सोना के बीच करीब बीस मिनट तक कुश्ती हुई, जिसके बार हार और जीत का फैसला नहीं होने पर दोनों पहलवानों को 2500-2500 रुपये दिए गए। दंगल में दूसरी माली कोटभलवाल जम्मू के पहलवान कुलवीर ने हरियाणा के पहलवान मंजीत को हराकर जीती। बारिश के कारण दंगल में पूरी कुश्तियां नहीं हो पाई हैं। अब मंगलवार को लैड़ दंगल कमेटी की तरफ से कराए जाने वाले दंगल में पहलवान अपना दमखम दिखाएंगे।