बचपन में पहाड़ों का शौक, अब 200 से ज्यादा अल्पाइन झीलों की खोज; कौन हैं कश्मीर के जाहिद रफीक कोटा?
ज़ाहिद रफ़ीक कोटा ने बचपन के शौक को जुनून में बदला और हिमालय में 200 से अधिक अल्पाइन झीलों की ...और पढ़ें

कश्मीर के पहाड़ों में छिपे कुदरत के नगीने खोजते हैं जाहिद। (फोटो-इंटरनेट मीडिया)
HighLights
ज़ाहिद रफ़ीक कोटा ने हिमालय में 200 से अधिक अल्पाइन झीलें खोजीं।
उन्होंने माउंट टाटाकूटी सहित कई मुश्किल हिमालयी चोटियों पर चढ़ाई की।
उनका अनुभव कश्मीरी युवाओं को प्रेरणा और संरक्षण का संदेश देता है।
रजिया नूर, श्रीनगर। बचपन में बच्चों के शौक भी उन्हीं की तरह मासूम होते हैं। लड़के आमतौर पर क्रिकेट, फुटबाल आदि खेलना पसंद करते हैं, तो लड़कियां गुड्डे-गुड़ियों के साथ खेलती हैं। अलबत्ता, जाहिद रफीक कोटा की पसंद आम बच्चों से बिल्कुल हटकर थी। वह बचपन से ही झीलों, झरनों और पहाड़ियों की तरफ आकर्षित थे। पानी में गोता लगाना और छोटे-बड़े ढलानों पर चढ़ना जाहिद का पसंदीदा खेल था। उम्र बढ़ने के साथ-साथ जाहिद का यह शौक भी बढ़ता गया। जमीन पर बहने वाले झीलों और झरनों के बजाय पहाड़ों में छिपे झरने, जो आबशारों की सूरत में पहाड़ों से नीचे बहते थे, जाहिद के कदम रोक लेते थे।
वह अक्सर सोच में पड़ जाते कि आखिर ये झीलें और झरने कहां से आते हैं और उनका स्रोत क्या है? इन गुप्त झीलों और झरनों को खोज निकालने की जाहिद में ललक बढ़ती गई। वैसे भी, बांडीपुर में जन्मे जाहिद ने प्रकृति को करीब से देखा था।
पढ़ाई के दौरान खाली समय में वह पहाड़ों की तरफ निकल जाते और वहां छिपे कुदरत के उन नगीनों को तलाशने में जुट जाते। यह सब इतना आसान नहीं था। पहाड़ों में घूमते-घूमते जाहिद के पांव छिल जाते और उनमें सूजन आ जाती। अलबत्ता, वह हिम्मत नहीं हारते, बल्कि इस सबके बीच पहाड़ों से उनका मोह और भी बढ़ जाता। आखिरकार, पहाड़ों में उनकी खोज रंग लाई और उन्होंने वहां छिपी बेशुमार गुप्त झीलों और झरनों को खोज निकाला।
हिमालय में 200 से ज्यादा अल्पाइन झीलों की खोज
अपनी इस अनूठी रुचि के चलते जाहिद ने हिमालय में 200 से अधिक अल्पाइन झीलों की खोज की है। इनमें पीर पंजाल, कश्मीर, किश्तवाड़, जांस्कर, लद्दाख और काराकोरम की विभिन्न पर्वत शृंखलाओं में स्थित झीलें शामिल हैं।
उनकी यात्राएं साहसिक अन्वेषण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती हैं। साथ ही, ये हिमालयी क्षेत्र की असाधारण भौगोलिक विविधता को भी सामने लाती हैं। हर अभियान के लिए सावधानीपूर्वक योजना, शारीरिक फिटनेस, दिशा-निर्धारण का कौशल और पहाड़ों की अप्रत्याशित परिस्थितियों से निपटने की क्षमता जरूरी होती है।
खड़ी चढ़ाइयों और पथरीले रास्तों से लेकर बदलते मौसम और अधिक ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों तक, हर चुनौती का सामना करने के लिए धैर्य, अनुशासन और साहसिक भावना की जरूरत होती है।
जाहिद के अनुभव बताते हैं कि किस तरह व्यक्तिगत जुनून और लगातार प्रयास कम चर्चित प्राकृतिक स्थलों को पहचान दिलाने और उनके बारे में अधिक से अधिक लोगों तक जानकारी पहुंचाने में मदद कर सकते हैं।
घाटी की अनदेखी खूबसूरती दुनिया के सामने लाने का जुनून
घाटी अपनी अद्भुत सुंदरता के चलते पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां के शानदार नजारे, बर्फ से ढके पहाड़, हरे-भरे घास के मैदान और क्रिस्टल जैसी साफ झीलें देश-दुनिया के कोने-कोने से पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
अलबत्ता, प्रकृति को करीब से देखने की इच्छा रखने वालों के लिए इन ऊंचे-खूबसूरत पहाड़ों और हरी-भरी घाटियों के पीछे एक और दुनिया छिपी है। यह दुनिया अनदेखी अल्पाइन झीलों, दुर्गम पहाड़ी दर्रों और शानदार हिमालयी चोटियों से भरी है, जो रोमांच और अन्वेषण के शौकीनों को आकर्षित करती है। जाहिद भी उन्हीं में से एक हैं।
इस अनदेखी दुनिया को लोगों के सामने लाने के लिए जाहिद ने अपनी हिम्मत, लगन और रोमांच के प्रति कभी न खत्म होने वाले जुनून से एक अलग पहचान बनाई है। उनकी शानदार यात्रा मानवीय प्रयासों, दृढ़ संकल्प और हिमालय के साथ उनके गहरे रिश्ते की मिसाल है।
माउंट हरमुख से टाटाकूटी तक कठिन चोटियों पर चढ़े जाहिद
अल्पाइन झीलों की खोज करने के अलावा, जाहिद ने हिमालय की कई दुर्गम चोटियों पर भी चढ़ाई की है। इनमें माउंट टाटाकूटी, माउंट लोहारकुट, माउंट हरमुख और कटसल पीक शामिल हैं। ये उपलब्धियां पर्वतारोहण के प्रति उनके समर्पण और हिमालय के दुर्गम इलाकों को खोजने के उनके जुनून को दर्शाती हैं।
जाहिद के अनुसार, अधिक ऊंचाई वाले अभियानों के लिए केवल शारीरिक ताकत ही नहीं, बल्कि तकनीकी जानकारी, सही समय पर निर्णय लेने की क्षमता, जोखिमों की समझ और प्राकृतिक परिस्थितियों के प्रति सम्मान भी जरूरी है।
पर्वतारोहण के अपने कौशल को निखारने के लिए जाहिद ने पहलगाम स्थित जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स से बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स पूरा किया। इस तरह का औपचारिक प्रशिक्षण पहाड़ों में सुरक्षा, चढ़ाई की तकनीक और जिम्मेदारी के साथ अभियान चलाने की समझ विकसित करने में मदद करता है। इससे पर्वतारोहियों को दुर्गम क्षेत्रों में बेहतर तैयारी के साथ जाने में मदद मिलती है।
जाहिद ने कहा, 'यह सब इतना आसान नहीं था। इस सफर में मुझे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन मैंने अपने इरादे पहाड़ों की तरह मजबूत रखे और आखिरकार अपने मिशन में सफल रहा।'
जाहिद ने बताया पहाड़ों में रोजगार का रास्ता
जाहिद का सफर कश्मीर के युवाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश भी देता है। जाहिद ने कहा, 'पहाड़ों की खोज करना मेरा मिशन है, लेकिन युवा इसे अपना करियर भी बना सकते हैं। जरूरी कौशल विकसित करके, शारीरिक फिटनेस बनाए रखकर और अनुभवी पेशेवरों से सीखकर वे अपने शौक को आजीविका के साधन में बदल सकते हैं।'
जाहिद के अनुसार, घाटी की प्राकृतिक संपदा की खूबसूरती को केवल सामान्य पर्यटन के जरिए ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार साहसिक गतिविधियों के माध्यम से भी दुनिया के सामने लाया जा सकता है।
उनके अनुभव स्थानीय युवाओं को अपने आसपास के क्षेत्रों की खोज करने, कम चर्चित जगहों का दस्तावेजीकरण करने और इलाके की भौगोलिक व सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, 'उचित प्रशिक्षण, सुरक्षा उपायों और संस्थागत सहयोग के साथ साहसिक पर्यटन दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में स्थानीय गाइड, आतिथ्य सेवाएं देने वालों और छोटे कारोबारियों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है।'
कश्मीर की प्राकृतिक दौलत बचाने की अपील
जाहिद ने कहा, 'हमारे प्रदेश के पहाड़ बेशुमार प्राकृतिक खजानों से भरे पड़े हैं, जिनमें अल्पाइन झीलें प्रमुख हैं। लेकिन जरूरत इस बात की है कि इनका संरक्षण किया जाए। पहाड़ी पर्यटन और ट्रेकिंग को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण के संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।'
उन्होंने कहा कि ये नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र प्लास्टिक कचरे, प्रदूषण, अनियंत्रित पर्यटन और स्थानीय वन्यजीवों को होने वाले नुकसान के प्रति संवेदनशील हैं। ट्रेकर्स और पर्वतारोहियों को जिम्मेदार यात्रा के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। इनमें अपना कचरा वापस ले जाना, स्थानीय समुदायों का सम्मान करना, पेड़-पौधों को नुकसान से बचाना और तय सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करना शामिल है।
इन तरीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने से आने वाली पीढ़ियों के लिए कश्मीर के स्वच्छ और सुंदर प्राकृतिक नजारों को बचाने में मदद मिल सकती है।
साथ ही, इससे टिकाऊ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। दूरदराज की झीलों और पहाड़ी रास्तों का जिम्मेदारी से दस्तावेजीकरण करने से हिमालय और उसके प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व को बेहतर ढंग से समझने में भी मदद मिल सकती है।
