दरगाह में तहरी-खाना बांटने पर रोक! वक्फ बोर्ड के फैसले से कश्मीर में मचा घमासान, तनवीर सादिक और अल्ताफ बुखारी भड़के
जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड द्वारा दरगाहों में तहरी बांटने और पक्षियों को दाना खिलाने पर प्रतिबंध लगाने के फैसले ने नई ...और पढ़ें

दरगाहों में तहरी पर रोक को लेकर अल्ताफ बुखारी-तनवीर सादिक ने वक्फ बोर्ड को घेरा । (फाइल फोटो)
HighLights
वक्फ बोर्ड ने दरगाहों में तहरी बांटने, पक्षियों को दाना खिलाने पर रोक लगाई।
फैसला सफाई और वेस्ट मैनेजमेंट के नाम पर लिया गया, विवाद बढ़ा।
राजनीतिक दल और लोग इसे धार्मिक आस्था, परंपराओं के खिलाफ बता रहे हैं।
नवीन नवाज, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की दरगाहों में अब तहरी, खाना बांटने और पक्षियों को दाना खिलाने पर रोक लगाने के वक्फ बोर्ड के फैसले ने कश्मीर में नई बहस छेड़ दी है। सफाई और वेस्ट मैनेजमेंट के नाम पर लिया गया यह फैसला सीधे लोगों की धार्मिक आस्था और सदियों पुरानी परंपराओं से टकराता नजर आ रहा है। बोर्ड के एलान के बाद राजनीतिक दलों से लेकर आम लोगों तक ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं कि क्या गंदगी रोकने का रास्ता परंपराओं पर पूर्ण प्रतिबंध है?
जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन डॉ. सैयद दरख्शां अंद्राबी ने रविवार को कहा कि दरगाहों और वक्फ संपत्तियों के भीतर पक्षियों को दाना डालने और ऐसी खाद्य सामग्री बांटने पर पूरी तरह रोक रहेगी, जिससे कचरा फैलता है या आवारा कुत्ते आकर्षित होते हैं।
दरगाहों में तहरी बांटने पर रोक की अपील
बडगाम के चरार-ए-शरीफ में शेख नूर-उद-दीन नूरानी की दरगाह के दौरे के दौरान अंद्राबी ने कहा कि दरगाहों के अंदर तहरी बांटने और पक्षियों को खाना खिलाने से सफाई व्यवस्था बिगड़ रही है। उनका आरोप है कि खाने का बचा हुआ हिस्सा परिसर में फैलता है, कबूतरों की संख्या बढ़ती है और आवारा कुत्ते भी इन जगहों की ओर खिंचे चले आते हैं।
अंद्राबी ने महिलाओं से भी दरगाहों में तहरी नहीं लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने दरगाह परिसरों के बाहर अलग शेड बनाए हैं, जहां खाने-पीने की चीजें बांटी जा सकती हैं।
लेकिन यही एलान अब विवाद की जड़ बन गया है। कश्मीर में तहरी, नियाज़, मटन और हलवा जैसी चीजों का बांटा जाना सिर्फ खाना नहीं माना जाता, बल्कि इसे लंबे समय से चली आ रही धार्मिक और सामाजिक परंपरा से जोड़ा जाता है। ऐसे में पूर्ण प्रतिबंध ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रशासनिक सुविधा के नाम पर आस्था से जुड़ी परंपराओं को खत्म किया जा सकता है?
विवाद बढ़ने के बाद अंद्राबी को अपने बयान पर सफाई देनी पड़ी और कहा गया कि उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया। मगर तब तक राजनीतिक विरोध तेज हो चुका था।
विधायक तनवीर सादिक ने किया वक्फ बोर्ड के फैसले का विरोध
नेशनल कान्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता और जडीबल के विधायक तनवीर सादिक ने वक्फ बोर्ड के फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर की परंपराएं हाल के वर्षों की देन नहीं हैं। लोग पीढ़ियों से दरगाहों पर नियाज़, तहरी और खाना चढ़ाते और बांटते आए हैं।
सादिक ने साफ कहा कि सफाई और हाइजीन जरूरी हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि परंपराओं पर पूरी तरह रोक लगा दी जाए। उनका सुझाव है कि बेहतर व्यवस्था और नियमन के जरिए दोनों जरूरतों के बीच संतुलन बनाया जाए।
अल्ताफ बुखारी का भी बोर्ड के फैसले पर निशाना साधा
पूर्व मंत्री और अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने भी बोर्ड के फैसले पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तहरी और खाना बांटने पर प्रतिबंध लगाना सफाई की समस्या का समाधान नहीं है। बोर्ड को बेहतर वेस्ट मैनेजमेंट और सफाई व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए, न कि सदियों पुरानी परंपराओं को बंद करना चाहिए।
हालांकि, वन्यजीव विभाग के कुछ अधिकारियों ने कबूतरों को दाना खिलाने पर रोक के फैसले का समर्थन किया है। वाइल्डलाइफ वार्डन इंतेसार सुहैल के मुताबिक, गलत तरीके से दाना खिलाने के कारण कई जगह कबूतरों की समस्या गंभीर हो गई है। स्थानीय निवासी शफीक अहमद ने भी कहा कि कबूतरों की बीट और खाने के अवशेषों से मज़ारों के आसपास गंदगी और प्रदूषण बढ़ रहा है।
यानी विवाद अब सिर्फ तहरी बनाम सफाई का नहीं रह गया है। एक तरफ वक्फ बोर्ड सफाई, संपत्ति के संरक्षण और आवारा जानवरों की समस्या का हवाला दे रहा है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक दल और आम लोग इसे आस्था और परंपरा के सवाल से जोड़ रहे हैं।
