राज्य ब्यूरो, श्रीनगर : अनंतनाग में बुधवार को मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिदीन के स्वयंभू डिवीजनल कमांडर अल्ताफ अहमद डार उर्फ काचरू उर्फ मोईन और आतंकी उमर की मौत सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी कामयाबी बताई जा रही है। इन दोनों आतंकियों की मौत से न सिर्फ हिजबुल मुजाहिदीन को बल्कि दक्षिण कश्मीर में जैश, अल-बदर और लश्कर को भी नुकसान हुआ है। काचरू दक्षिण कश्मीर में विभिन्न आतंकी संगठनों के बीच समन्वय का काम भी करता था और कई बार उसने लश्कर के आतंकियिों के साथ मिलकर सुरक्षाबलों पर हमले भी किए थे। वह वह करीब 15 सालों तक आतंकी गतिविधियों में सक्रिय रहा। हावूरा कुलगाम का रहने वाला काचरू वर्ष 2007 में पकड़ा गया था, लेकिन कुछ समय बाद वह रिहा हुआ और फिर आतंकी गतिविधियों में शामिल हुआ। वह दोबारा पकड़ा गया और करीब पांच माह बाद रिहा हुआ और उसके बाद उसने कुछ समय तक बतौर ओवरग्राउंड वर्कर काम किया और वर्ष 2014 के बाद वह पुन: हिज्ब में सक्रिय हो गया था। उसके पिता भी एक आतंकी थे जो 1992 में एलओसी पर सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे। काचरू कई बार सुरक्षाबलों की घेराबंदी तोड़ भाग निकला, उसे कार्डन ब्रेकर भी कहते थे।

अल्ताफ काचरू के खिलाफ दक्षिण कश्मीर से श्रीनगर तक करीब एक दर्जन से ज्यादा आतंकी वारदातों के सिलसिले में विभिन्न एफआइआर दर्ज हैं। वह जुलाई 2016 में मारे गए आतंकी बुरहान के साथ भी कई बार देखा गया था। उसने ही यासीन यत्तू उर्फ गजनवी के साथ मिलकर दक्षिण कश्मीर में स्थानीय आतंकियों का नेटवर्क मजबूत किया था। बुरहान के मारे जाने के बाद उसने व यासीन ने सुरक्षाबलों के खिलाफ वादी में ¨हसक प्रदर्शनों के आयोजन में अहम भूमिका निभाई थी। यासीन यत्तू गत वर्ष अवनीरा शोपियां में मारा गया था। काचरू की आतंकी संगठनों में पैठ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2015 में जब लश्कर और हिजब में ओवरग्राउंड वर्करों के मुद्दे पर विवाद पैदा हुआ था तो उस समय काचरू और यासीन ने मिलकर ही दोनों संगठनों के सक्रिय आतंकियों की बैठक आयोजित कर मामले को हल किया था। इसी बैठक के दौरान बुरहान व उसके साथियों द्वारा ¨खचवाई गई तस्वीर मीडिया में वायरल हुई थी, जो कई दिनों तक सुर्खियों में रही थी। उमर रशीद श्रीनगर में फैला रहा था आतंकी :

उमर रशीद बीते साल ही आतंकी बना था, लेकिन वह हिजब कैडर में तेजी से एक दुर्दात आतंकी के रूप में अपनी पहचान बना रहा था। वह दक्षिण कश्मीर में पुलिस के दल पर हमलों और नागरिक हत्याओं की करीब एक दर्जन वारदातों में शामिल रहा है। वह बीते माह अनंतनाग में एक पुलिसकर्मी की हत्या में भी शामिल था। उसे हिज्ब ने एक सब्जार नामक आतंकी कमांडर संग श्रीनगर में सनसनीखेज वारदातों को जिम्मा सौंपा था और इसी साजिश के तहत गत माह 24 जुलाई को श्रीनगर के बटमालू में उसने सीआरपीएफ के गश्तील पर हमला किया था। इस हमले में एक सीआरपीएफ कर्मी शहीद हो गया था। इसी माह 12 अगस्त को सुरक्षाबलों ने उसे बटमालू में घेर लिया था। लेकिन वह अपने साथियों संग मुठभेड़ में बच निकला। इस मुठभेड़ में एक पुलिसकर्मी शहीद हो गया था। उमर की मौत से श्रीनगर में आतंकियों द्वारा अफरा तफरी फैलाने की साजिश फिलहाल नाकाम हो गई है। नवीद जट समेत एक दर्जन आतंकी शामिल हुए जनाजे में :

अल्ताफ काचरू और उमर को उनके पैतृक गांवों हावूरा और खुडवनी में ही दफनाया गया। दोनों आतंकियों के जनाजे में सैकड़ों की लोग शामिल हुए। बताया जा रहा है कि काचरू व उमर के जनाजे में लश्कर कमांडर नवीद जट समेत एक दर्जन आतंकी चार अलग अलग गुटों में आए और उन्होंने हवा में गोलियां चलाई। आतंकियों के जनाजे में हिज्ब और पाकिस्तान के झंडे लहराते हुए शरारती तत्वों ने राष्ट्रविरोधी नारे भी लगाए।

Posted By: Jagran