शोपियां में बंद दारुल उलूम फिर खुलेगा, 1200 छात्रों की पढ़ाई होगी बहाल
शोपियां के बंद दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम को अदालत ने फिर से खोलने का आदेश दिया है। इस फैसले से 1200 छात्रों की पढ़ाई बहाल होगी।

शोपियां में बंद दारुल उलूम फिर खुलेगा। फाइल फोटो
HighLights
शोपियां के बंद दारुल उलूम को अदालत ने फिर से खोलने का आदेश दिया।
इस फैसले से 1200 छात्रों की पढ़ाई का रास्ता साफ हुआ।
अदालत ने संस्थान बंद करने की कार्रवाई को प्रथम दृष्टया अत्यधिक बताया।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के शोपियां में बंद किए गए दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम को लेकर अदालत ने बड़ा आदेश जारी किया है। प्रिंसिपल एंड सेशन जज शोपियां महमूद अहमद चौधरी ने संस्थान को दोबारा खोलने और अंतिम फैसला आने तक शैक्षणिक गतिविधियां जारी रखने की अनुमति दी है। यह आदेश संस्थान की ओर से दायर अंतरिम राहत की याचिका पर सुनाया गया।
अदालत में संस्थान की ओर से पेश अधिवक्ता एसएम इकबाल ने बताया कि यहां करीब 1200 छात्र शिक्षा हासिल कर रहे थे, जिनमें लगभग 400 छात्र आवासीय हैं। उन्होंने अदालत के सामने छात्रों की शिक्षा और भविष्य का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मुख्य मामला अभी विचाराधीन है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई को अनिश्चितकाल तक प्रभावित नहीं किया जा सकता।
संस्थान की ओर से यह भी दलील दी गई कि बंद रहने के दौरान उसकी संपत्तियां खराब हो रही हैं और उचित प्रशासनिक व्यवस्था भी नहीं हो पाई है। अदालत ने मौजूदा स्तर पर सरकार की ओर से पेश सामग्री को पूरे संस्थान को बंद रखने के लिए पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि लगाए गए आरोपों के मुकाबले संस्थान पर की गई कार्रवाई प्रथम दृष्टया अत्यधिक थी।
हालांकि, दोबारा खुलने के बाद संस्थान की गतिविधियां निगरानी में रहेंगी। सरकार को तीन सदस्यीय समिति गठित करने का निर्देश दिया गया है, जो प्रबंधन और आवेदकों के साथ मिलकर अदालत द्वारा तय शर्तों के पालन की निगरानी करेगी।
छात्रों की वापसी का रास्ता भी हुआ साफ
अदालत ने छात्रों की वापसी का रास्ता भी साफ कर दिया है। आदेश को समाचार पत्रों और अन्य माध्यमों से व्यापक रूप से प्रकाशित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि संस्थान छोड़ चुके छात्र वापस लौट सकें। खास बात यह है कि यदि किसी छात्र ने कहीं और दाखिला भी ले लिया है, तब भी उसकी वापसी में कोई बाधा नहीं डाली जाएगी।
अधिवक्ता बशरत अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार की कार्रवाई संस्थान में कथित अवैध गतिविधियों के आरोपों पर आधारित थी। उनके मुताबिक, आवेदकों ने आरोपों के जवाब में दस्तावेज और अन्य सामग्री अदालत में पेश की, जबकि विरोधी पक्ष संस्थान में ऐसी गतिविधियां होने का प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका।
आपको बता दें कि 24 अप्रैल को डिविजनल कमिश्नर कश्मीर अंशुल गर्ग के आदेश के बाद संस्थान बंद किया गया था। प्रशासन ने एक डोजियर में संस्थान के कथित तौर पर प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी से लगातार और गुप्त संबंध होने का दावा किया था।
जमात-ए-इस्लामी को केंद्र सरकार ने 2019 में प्रतिबंधित किया था। संस्थान पर हुई कार्रवाई को लेकर जम्मू-कश्मीर के कई राजनीतिक नेताओं और दलों ने भी सवाल उठाते हुए आदेश वापस लेने की मांग की थी।
