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जम्मू-कश्मीर के गांवों में तकनीकी क्रांति, बनेंगे स्मार्ट विलेज सेंटर; युवाओं को मिलेगा रोजगार

Published: Thu, 10 Sep 2026 05:52 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आरयूटैगई स्मार्ट विलेज सेंटर (आरएसवीसी) स्थापित कर रहा है।

जम्मू-कश्मीर में बनेंगे स्मार्ट विलेज सेंटर। यह फोटो एआई की मदद से बनाई गई है

जम्मू-कश्मीर में बनेंगे स्मार्ट विलेज सेंटर। यह फोटो एआई की मदद से बनाई गई है

HighLights

  1. ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा।

  2. आरयूटैगई स्मार्ट विलेज सेंटर (आरएसवीसी) स्थापित करने की तैयारी।

  3. रोजगार, कौशल विकास और स्थानीय उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने आरयूटैगई स्मार्ट विलेज सेंटर (आरएसवीसी) स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने बुधवार को मंथन प्लेटफार्म से जुड़े अधिकारियों और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर इसके कार्यान्वयन की रूपरेखा और संस्थागत ढांचे पर चर्चा की।

मुख्य सचिव ने कहा कि आरएसवीसी को जम्मू-कश्मीर की स्थानीय सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य ग्रामीण समुदायों तक उपयुक्त तकनीक पहुंचाकर रोजगार, कौशल विकास, उद्यमिता, आजीविका और स्थानीय मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कार्यक्रम की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश दिए, जिसमें सरकारी विभागों के अलावा विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और जमीनी संगठनों को शामिल किया जाएगा।

मंथन से जुड़े संस्थानों के साथ समन्वय

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को नोडल विभाग बनाया जाएगा और वह भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय तथा मंथन से जुड़े संस्थानों के साथ समन्वय करेगा।

आरएसवीसी के तहत कृषि, बागवानी, जलविद्युत, हस्तशिल्प, आतिथ्य, शिक्षा, बुजुर्ग देखभाल और नशा-मुक्ति जैसे क्षेत्रों में तकनीकी समाधान विकसित किए जाएंगे।

मुख्य सचिव ने मिशन युवा और जेकेआरएलएम के साथ अभिसरण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रभावी और मापनीय परिणाम देने वाली परियोजनाओं के लिए धन की कमी बाधा नहीं बनेगी।