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स्टेटहुड पर विधानसभा में घमासान, अब दिल्ली में अमित शाह से मिले सुनील शर्मा; जम्मू-कश्मीर की सियासत में खलबली

By Naveen NawazEdited By: Dallu Slathia
Published: Sat, 26 Sep 2026 01:43 PM (IST)

सुनील शर्मा ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की, यह बैठक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य ...और पढ़ें

राज्य के दर्जे की बहाली पर घमासान के बीच सुनील शर्मा की अमित शाह से मुलाकात।

राज्य के दर्जे की बहाली पर घमासान के बीच सुनील शर्मा की अमित शाह से मुलाकात।

HighLights

  1. सुनील शर्मा ने अमित शाह से जम्मू-कश्मीर के मुद्दों पर चर्चा की।

  2. राज्य के दर्जे की बहाली पर विधानसभा में राजनीतिक तनातनी जारी है।

  3. भाजपा अनुच्छेद 370 से राज्य के दर्जे को जोड़ने का विरोध करती है।

नवीन नवाज, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर विधानसभा में तेज हुई राजनीतिक तनातनी के बीच नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। बैठक ऐसे समय हुई है जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सरकार द्वारा पेश राज्य के दर्जे की बहाली से जुड़े प्रस्ताव ने विधानसभा में सत्ता पक्ष और भाजपा के बीच पुराने राजनीतिक मतभेदों को फिर सतह पर ला दिया है।

बैठक में जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति, कानून-व्यवस्था, विकास, शासन व्यवस्था और विधानसभा के मौजूदा घटनाक्रम सहित जनता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। सुनील शर्मा ने केंद्र सरकार के समक्ष जम्मू-कश्मीर से संबंधित कई विषय रखे। शर्मा के मुताबिक, अमित शाह ने शांति, विकास और समृद्धि के प्रति केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराते हुए महत्वपूर्ण मामलों में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।

हालांकि बैठक का राजनीतिक महत्व केवल सुरक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं माना जा रहा। यह मुलाकात उस वक्त हुई है जब विधानसभा में राज्य के दर्जे की बहाली की मांग के साथ 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव और नवंबर 2024 के प्रस्ताव के संदर्भ को लेकर भाजपा ने कड़ा ऐतराज दर्ज कराया है।

स्टेटहुड प्रस्ताव में 2000 के ऑटोनॉमी जिक्र पर क्यों भड़की BJP?

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पेश किया है। प्रस्ताव में पूर्व में पारित विधानसभा प्रस्तावों का संदर्भ देते हुए भारत सरकार से राज्य का दर्जा बहाल करने का आग्रह किया गया है।

यहीं से विधानसभा की बहस ने राजनीतिक धार पकड़ ली है। भाजपा का स्पष्ट तर्क है कि राज्य के दर्जे की बहाली का सवाल एक अलग संवैधानिक और राजनीतिक विषय है तथा इसे अनुच्छेद 370 और स्वायत्तता जैसे मुद्दों के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। भाजपा ने विशेष रूप से वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के उल्लेख पर सवाल उठाए हैं।

नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने कहा है कि भाजपा जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन अनुच्छेद 370 और स्वायत्तता के मुद्दों को मौजूदा प्रस्ताव में शामिल किए जाने का विरोध करती है। भाजपा का कहना है कि राज्य के दर्जे की बहाली की मांग को पुराने और अलग राजनीतिक प्रस्तावों के संदर्भ से अलग रखा जाना चाहिए।

पुराने प्रस्तावों के जिक्र पर उमर की सफाई

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कहना है कि पुराने विधानसभा प्रस्तावों का उल्लेख उन्हें दोबारा लागू करने या उनकी राजनीतिक मांगों को पुनर्जीवित करने के लिए नहीं किया गया है। उनके अनुसार, मौजूदा प्रस्ताव का मूल और केंद्रीय मुद्दा जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग है।

उमर अब्दुल्ला ने राज्य के दर्जे की बहाली को जम्मू-कश्मीर के लोगों से किए गए वादे से जोड़ते हुए कहा है कि परिसीमन और विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए।

पुराने प्रस्तावों के जिक्र ने बढ़ाया विवाद

इस पूरे विवाद में असली टकराव फिलहाल मांग से अधिक प्रस्ताव की भाषा और उसके राजनीतिक संदर्भों को लेकर दिखाई दे रहा है। सरकार पुराने विधानसभा प्रस्तावों का संदर्भ देकर राज्य के दर्जे की बहाली की मांग को व्यापक राजनीतिक पृष्ठभूमि में रख रही है, जबकि भाजपा राज्य के दर्जे के प्रश्न को अनुच्छेद 370 और स्वायत्तता के मुद्दों से स्पष्ट रूप से अलग रखने पर जोर दे रही है।

शाह से मुलाकात ने बढ़ाई हलचल

ऐसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील दौर में सुनील शर्मा की अमित शाह से मुलाकात ने विधानसभा के घटनाक्रम पर निगाहें और तेज कर दी हैं। हालांकि, बैठक में विधानसभा के मौजूदा प्रस्ताव के किसी विशेष प्रावधान पर क्या चर्चा हुई, इसका विस्तृत आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य के दर्जे की बहाली का मुद्दा अब केवल एक प्रस्ताव तक सीमित नहीं रह गया है। इसके साथ प्रस्ताव की भाषा, पुराने राजनीतिक प्रस्तावों के संदर्भ और केंद्र-प्रदेश संबंधों की दिशा पर भी तीखी बहस छिड़ चुकी है। आने वाले दिनों में विधानसभा में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और भाजपा के बीच टकराव और स्पष्ट होने के आसार हैं।