राज्य ब्यूरो, जम्मू: भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आजीविका मिशन हिमायत को लागू करने में जम्मू कश्मीर विफल रहा है। 2016-19 के बीच 53,547 के लक्ष्य के मुकाबले योजना के तहत केवल 4,494 उम्मीदवारों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया यानी सिर्फ आठ प्रतिशत ही। फेडरल आडिटर ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा कि 2016 से 2019 के बीच मंजूर 237.74 करोड़ रुपये में से 134.84 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा प्रशिक्षित 4,494 युवाओं में से केवल 732 युवाओं को इस दौरान नौकरियां दी गई। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने हिमायत मिशन शुरू किया था जो बाद में जम्मू और कश्मीर के तत्कालीन राज्य के लिए दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना के तहत एक अलग कार्यक्षेत्र के रूप में कार्य करने लगा। यह प्रशिक्षण, आवासीय और गैर-आवासीय दोनों, अंग्रेजी में संचार कौशल के साथ-साथ तकनीकी कौशल के लिए दिया जाना था। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016-17 और 2017-18 के दौरान केवल 123 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया था, लेकिन इन वर्षों के दौरान कोई प्लेसमेंट नहीं किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016-17 में मंजूर 46.72 करोड़ रुपये पर 9,200 युवाओं को कुशल बनाने और रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन इस दौरान कोई भी प्रशिक्षण नहीं किया गया। अलबत्ता 30.40 करोड़ रुपये का 60 प्रतिशत अपेक्षित परिणाम हासिल किए बिना खर्च कर दिया गया। 2017-18 में 123 को ही प्रशिक्षण मिला

2017-18 में मंजूर 60.10 करोड़ रुपयों से 18,352 युवाओं को कुशल करने के लक्ष्य के मुकाबले केवल 123 लोग प्रशिक्षित किए गए थे और 28.02 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी किसी को भी रोजगार नहीं दिया गया। साल 2018-2019 में, 25,995 युवाओं में से 4,371 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया और 732 को रोजगार दिया गया। इस पर 76.42 करोड़ रुपये या स्वीकृत राशि का 43 प्रतिशत खर्च किया गया था। 2019-20 के लिए कोई लक्ष्य तय नहीं किया

कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2019-20 के लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया था। हालांकि, 10,045 बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षित किया गया और 2,582 को योजना के तहत नौकरियों में रखा गया था। वर्ष 2019-20 के दौरान केंद्र सरकार द्वारा 234.94 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई थी, लेकिन जम्मू-कश्मीर सरकार ने हिमायत मिशन के पक्ष में 52.68 करोड़ रुपये जारी किए और 182.26 करोड़ रुपये बरकरार रखे। वर्ष के दौरान 23.83 करोड़ रुपये खर्च हुए। 31 मार्च 2020 के अंत में 314.01 करोड़ रुपये इस्तेमाल नहीं हो पाए।

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